यहां 18 घंटे से कायम है अंधेरा: 1912 में शिकायत के बाद बिना सप्लाई बहाल किए विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज हो गया समस्या हल, ग्राहक को भेजा गया समाधान का मैसेज

यहां 18 घंटे से कायम है अंधेरा: 1912 में शिकायत के बाद बिना सप्लाई बहाल किए विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज हो गया समस्या हल, ग्राहक को भेजा गया समाधान का मैसेज

बलौदा बाजार। इन दिनों बिजली कटौती ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। 12 सितंबर की दोपहर करीब 3 बजे से 13 सितंबर की सुबह तक 18 घंटे बिजली बंद है।इससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे हैरानी की बात यह है कि बिजली विभाग की 1912 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने के बाद भी सप्लाई बहाल नहीं हुई, लेकिन विभाग की ओर से उपभोक्ता के मोबाइल पर समस्या का हल किए जाने का मैसेज जरूर भेज दिया गया।

यहां 18 घंटे से कायम है अंधेरा
इस तरह से आया मैसेज।

ग्राम पंचायत भरसेली और आश्रित ग्राम छुईहा क्षेत्र और टंडन कॉलोनी प्रशासनिक अधिकारियों के उदासीनता का शिकार बन रहा है। यहां बिजली बंद होने के बाद उपभोक्ता ने 1912 पर शिकायत दर्ज कराई। CSPDCL की ओर से भेजे गए संदेश में बताया गया कि शिकायत दर्ज की गई है। लेकिन इसके बाद विभाग की ओर से सुबह 5:09 बजे एक और संदेश आया, जिसमें लिखा था कि उपभोक्ता की शिकायत का समाधान कर दिया गया है। विभाग ने समस्या बने रहने पर फीडबैक देने के लिए बिजली एप का उपयोग करने की बात भी कही।

सवाल यह है कि जब मौके पर बिजली की सप्लाई ही बहाल नहीं हुई थी, तो शिकायत का समाधान आखिर किस आधार पर कर दिया गया?
1912 पर शिकायत का मतलब सिर्फ मैसेज भेजना है?
ग्रामीणों की परेशानी यहीं खत्म नहीं होती। लगातार घंटों बिजली गुल रहने के बाद जब उपभोक्ता शिकायत करता है तो उससे उम्मीद होती है कि विभाग मौके की समस्या दूर कर बिजली आपूर्ति बहाल करेगा। लेकिन यहां शिकायत के बाद भी बिजली बंद रही और सिस्टम में शिकायत का समाधान दर्ज कर दिया गया।

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ऐसे में 1912 हेल्पलाइन और बिजली विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या शिकायत का समाधान बिजली बहाल होने के बाद होना चाहिए या सिर्फ सिस्टम में उसे क्लोज कर देना ही समाधान माना जा रहा है?

चार बूंद पानी पड़ते ही ठंडे पड़ रहे बिजली विभाग के तार

क्षेत्र में इससे पहले भी लगातार बिजली कटौती की शिकायत सामने आती रही है। हल्की फुहार के बाद घंटों बिजली बंद होना और फिर बिना स्पष्ट कारण बताए सप्लाई बाधित रहना ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। सुबह बिजली नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई, नौकरीपेशा लोगों की तैयारी और ग्रामीणों के रोजमर्रा के काम प्रभावित होते हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों से स्पष्ट जवाब नहीं मिलना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। बता दें कि हालात ऐसे बन रहे हैं कि हल्की बारिश से ही बिजली लाइनें घंटो ठंडी पड़ जाती हैं।

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सरप्लस राज्य में कायम है 18 घंटे का अंधेरा

छत्तीसगढ़ को बिजली के मामले में सरप्लस राज्य कहा जाता है। ऐसे में एक ग्रामीण इलाके में करीब 18 घंटे तक अंधेरा कायम रहना और शिकायत दर्ज होने के बावजूद समय पर समाधान नहीं होना बिजली विभाग की व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।

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सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर बिजली चालू किए बिना ही शिकायत का समाधान हो गया, तो फिर 1912 पर दर्ज शिकायत का वास्तविक समाधान कब होगा?
ग्रामीण अब सिर्फ बिजली आपूर्ति बहाल करने की नहीं, बल्कि बार-बार हो रही कटौती का कारण सार्वजनिक करने और शिकायतों के वास्तविक समाधान की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।

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Author: UnfearNews

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