प्राचार्य की पत्रकारों से दुर्व्यवहार: बलौदा बाजार के पंडित चक्रपाणी स्कूल में शिक्षक पर शराब के नशे में पहुंचकर छात्राओं से गाली-गलौज और मारपीट का आरोप, कलेक्टर के निर्देश पर जांच शुरू

प्राचार्य की पत्रकारों से दुर्व्यवहार: बलौदा बाजार के पंडित चक्रपाणी स्कूल में शिक्षक पर शराब के नशे में पहुंचकर छात्राओं से गाली-गलौज और मारपीट का आरोप, कलेक्टर के निर्देश पर जांच शुरू

एजुकेशन रिपोर्टर | बलौदा बाजार

बलौदा बाजार जिला मुख्यालय स्थित पंडित चक्रपाणी मल्टीपरपज स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय एक बार फिर विवादों में है। इस बार स्कूल में पदस्थ साइंस के व्याख्याता नरेश तिवारी के कथित तौर पर शराब के नशे में स्कूल पहुंचने, छात्र छात्राओं से गाली-गलौज करने और विरोध करने पर मारपीट करने का आरोप लगा है। यह पूरा मामला एक सप्ताह से चल रहा है।वहीं स्कूल से जुड़े लोगों के अनुसार, शिक्षक पर पहले भी शराब पीकर स्कूल आने के आरोप लगते रहे हैं। वहीं घटना के बाद जब स्टूडेंट्स शिकायत लेकर प्राचार्य वंदनी श्रीवास्तव के पास पहुंचे, तो उन्होंने तत्काल कार्रवाई करने के बजाय आरोप है कि छात्र से मारपीट कर दी। इसका वीडियो भी सामने आया है। इस घटना के बाद छात्रों का आक्रोश भड़क गया और उन्होंने अपनी बात रखने के लिए मीडियाकर्मियों से संपर्क किया। वहीं जब मीडियाकर्मी स्कूल पहुंचे और प्राचार्य कक्ष में गए तो उनके साथ प्राचार्य वंदनी श्रीवास्तव ने बदसलूकी की। जिसके बाद पत्रकार धरने पर बैठ गए।

प्राचार्य की पत्रकारों से दुर्व्यवहार
प्राचार्य कक्ष में बैठक में उपस्थित स्कूली बच्चे और प्राचार्य।

बता दें कि विद्यार्थियों से मिली जानकारी के बाद पत्रकार दीपेंद्र शुक्ला, चंद्रकांत वर्मा और आशीष शुक्ला विद्यार्थियों की शिकायत और स्कूल में हुई घटना की जानकारी लेने तथा पूरे मामले का कवरेज करने पहुंचे थे। पत्रकार यहां कवरेज शुरू करते इससे पहले प्रभारी प्राचार्य वंदनी श्रीवास्तव ने पत्रकारों से बदसलूकी करने लगी और स्कूल परिसर में मीडिया का प्रवेश प्रतिबंधित है कहते हुए प्राचार्य कक्ष से बाहर चले जाने की बात कही। इस घटना से नाराज पत्रकारों ने मौके पर ही विरोध जताया। इसके बाद मामला केवल स्कूल के अंदर शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पत्रकारों के साथ व्यवहार को लेकर भी विरोध शुरू हो गया। प्रदर्शन के दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारियों के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई गई। पत्रकारों की मांग थी कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाए और स्कूल प्रबंधन की भूमिका की भी जांच हो। मामले की जानकारी जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन को भी दी गई। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को घटनाक्रम से अवगत कराया गया। इसके बाद प्रशासन की ओर से शिक्षा विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई। शाम करीब 4 बजे शुरू हुआ प्रदर्शन रात करीब 8 बजे तक जारी रहा। देर शाम शिक्षा विभाग की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ। शिक्षा विभाग की ओर से 17 सितंबर 2026 को लिखित आश्वासन पत्र जारी किया गया। पत्र पर केएस मेरावी, सहायक संचालक, कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी, बलौदा बाजार-भाटापारा के हस्ताक्षर हैं। आश्वासन पत्र में कहा गया है कि पंडित चक्रपाणी शासकीय बहुउद्देशीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बलौदाबाजार (सेजेस) की प्रभारी प्राचार्य वंदनी श्रीवास्तव को उनकी कार्य अक्षमता के कारण प्रभार से मुक्त किया जाएगा और संस्था के वरिष्ठ व्याख्याता को प्रभार सौंपा जाएगा। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिला शिक्षा अधिकारी अवकाश पर हैं। इसलिए 18 सितंबर 2026 को प्रभारी प्राचार्य को प्रभार से मुक्त करने का आदेश जारी किया जाएगा। यानी पत्रकारों के प्रदर्शन के बीच शिक्षा विभाग ने स्कूल की प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव का लिखित आश्वासन दिया है।

प्राचार्य की पत्रकारों से दुर्व्यवहार
स्कूल के बाहर प्रदर्शन करते पत्रकार।

बता दें कि विद्यार्थियों का आरोप है कि पहले स्कूल में साइंस के व्याख्याता नरेश तिवारी ने उनके साथ गाली गलौच किया और जब वे प्राचार्य कक्ष में अपने बचाव के लिए वीडियो बना रहे थे तब उनके साथ प्राचार्य वंदनी श्रीवास्तव ने मारपीट की। इधर मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर के निर्देश पर अनुविभागीय अधिकारी, प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी और तहसीलदार स्कूल पहुंचे और विद्यार्थियों, स्कूल प्रबंधन तथा संबंधित शिक्षक से जानकारी ली। जांच के बाद अधिकारियों ने संबंधित शिक्षक को मुलाहिजा के लिए पुलिस के हवाले कर दिया। हालांकि शराब के नशे, गाली-गलौज और मारपीट के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

मीडियाकर्मियों का कहना है कि न तो उन्होंने कोई वीडियो बनाया और न ही कोई लाइव स्ट्रीमिंग की सिर्फ वे वहां जानकारी लेने पहुंचे थे। उनके द्वारा उनके प्रवेश पर रोक से संबंधित कोई लिखित नियम या सक्षम अधिकारी का आदेश मौके पर उपलब्ध नहीं कराया गया। न ही ऐसा कोई आदेश स्कूल के मुख्य द्वार पर प्रदर्शित किया गया था। न ही ऐसा कोई आदेश प्रशासन और शिक्षा विभाग के तरफ से ही जारी किया गया है।

यह मामला सिर्फ एक शिक्षक पर लगे आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूल में अनुशासन, विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिकायतों के निराकरण की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। विद्यार्थियों का कहना है कि स्कूल ऐसा स्थान होना चाहिए जहां उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिले। अब प्रशासनिक जांच में यह सामने आना बाकी है कि वास्तव में स्कूल में क्या हुआ, शिक्षक की उस समय क्या स्थिति थी, मारपीट हुई या नहीं और शिकायत मिलने के बाद स्कूल प्रबंधन ने क्या कार्रवाई की। फिलहाल जांच जारी है और निष्कर्ष के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी। अब निगाहें 18 सितंबर को होने वाली विभागीय कार्रवाई और इसके बाद शिक्षक और प्राचार्य को लेकर लिए जाने वाले निर्णय पर टिकी हैं।

प्राचार्य पर तबियत का बहाना बनाकर परीक्षा छोड़ पार्टी करने पहुंचने का लग चुका है आरोप

बता दें कि कुछ माह पहले पंडित चक्रपाणि शुक्ल स्कूल की प्रभारी प्राचार्य वंदनी श्रीवास्तव पर माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित पूरक परीक्षा के दौरान केंद्राध्यक्ष रहते परीक्षा से तबियत खराब होने का बहाना बनाकर परीक्षा छोड़ पार्टी मानने जाने का आरोप लग चुका है। तब भी जब मामले को पत्रकारों ने कवरेज किया था तब उनके द्वारा पत्रकारों से बदसलूकी और एक पत्रकार की पुत्री को प्रताड़ित करने का मामला सामने आया था। हालांकि उस मामले की जानकारी डीपीई और माध्यमिक शिक्षा मंडल को भेजे जाने के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। न ही इस मामले में जिला स्तर पर की गई जांच टीम ने अपने रिपोर्ट को सार्वजनिक किया।

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जिले में नियमित प्राचार्यों के होते हुए भी व्याख्याता के भरोसे स्कूल की कमान

छत्तीसगढ़ सरकार के शिक्षा विभाग ने कुछ समय पहले ही सभी स्कूलों के लिए नियमित प्राचार्यों की पदस्थापना करने की कार्रवाई की थी। साथ ही स्कूलों में पदस्थ अतिशेष शिक्षकों को हटाने की कार्रवाई की गई थी, लेकिन इसके बाद भी जिले में स्वामी आत्मानंद योजनाओं के तहत संचालित पंडित चक्रपाणि शुक्ल स्कूल में नियमित प्राचार्य की नियुक्ति करने की जगह व्याख्याता को स्कूल की जिम्मेदारी दी गई। एक बात शिक्षाविभाग से सामने आई है कि पंडित चक्रपाणि शुक्ल स्कूल में पदस्थापना कराने के लिए कोई भी प्राचार्य तैयार नहीं है, इसकी वजह जिला शिक्षा अधिकारी का कार्यालय यहां होने और जिला मुख्यालय से लगे होने की बात सामने आई है। इसके अलावा यहां लगातार होने वाले इस परिसर के कार्यक्रमों के कारण यहां का रिजल्ट हमेशा खराब रहता है। यही वजह है कि जब इस वर्ष रिजल्ट में सुधार हुआ तो ढिंढोरा पीटा गया।

रवान में पदस्थापना के दौरान हुआ था बवाल

मामले की जानकारी लगने के बाद रवान गांव के लोगों ने बताया कि कुछ साल पहले वंदनी श्रीवास्तव रवान में पदस्थ थी, तब यहां पर बवाल हुआ था, जिसके बाद उनका तबादला किया गया था। लोगों का कहना है कि मैडम का व्यवहार शुरू से ही खराब रहा है।

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Author: UnfearNews

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