धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026 को हाईकोर्ट में चुनौती, छत्तीसगढ़ सरकार से तीन हफ्ते में जवाब तलब

धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026 को हाईकोर्ट में चुनौती, छत्तीसगढ़ सरकार से तीन हफ्ते में जवाब तलब

लीगल रिपोर्टर | बिलासपुर

छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026 और छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता नियम 2026 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता वी.एन. प्रसाद राव व अन्य की ओर से अधिवक्ता हर्षमंदर रस्तोगी ने 7 अक्टूबर को हाईकोर्ट की युगल पीठ के समक्ष याचिका प्रस्तुत की। मामले की वर्चुअल सुनवाई के दौरान, वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एस. मुरलीधर और वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज परांजपे ने याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखा।

धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026 को हाईकोर्ट में चुनौती, छत्तीसगढ़ सरकार से तीन हफ्ते में जवाब तलब
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि संविधान व्यक्ति को अपनी धार्मिक आस्था और निजी जीवन के संबंध में मौलिक अधिकार प्रदान करता है। उनका दावा है कि नए अधिनियम के तहत धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया में व्यक्ति को अपनी निजी धार्मिक पसंद का सार्वजनिक रूप से प्रकाशन करना होगा और विभिन्न विभागों तथा सरकारी अधिकारियों से अनुमति लेनी होगी। याचिका में कहा गया है कि इस प्रक्रिया में कम से कम 200 दिन तक का समय लग सकता है।

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धर्म परिवर्तन कराने वाले व्यक्ति के पंजीयन का प्रावधान

याचिका के अनुसार, अधिनियम में धर्म परिवर्तन कराने वाले व्यक्ति को भी सरकार के समक्ष अपना पंजीयन कराना अनिवार्य किया गया है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि अधिनियम में ऐसी कई परिस्थितियां निर्धारित की गई हैं, जिनके कारण कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहे, तब भी उसे कानूनी प्रक्रिया और विभिन्न शर्तों का सामना करना पड़ेगा।

7 साल से उम्रकैद तक सजा का प्रावधान होने का दावा

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि अधिनियम में कुछ परिस्थितियों में धर्म परिवर्तन से जुड़े कृत्यों को अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इसके लिए कम से कम 7 वर्ष की सजा से लेकर उम्रकैद तक तथा 10 लाख रुपये तक के अर्थदंड का प्रावधान होने का दावा किया गया है। याचिकाकर्ताओं ने इन प्रावधानों को नागरिकों के मौलिक अधिकारों और निजता के अधिकार के विपरीत बताते हुए चुनौती दी है।

सरकार को तीन सप्ताह में जवाब देना होगा

मामले की सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और न्यायाधीश संतोष शर्मा की युगल पीठ ने अंतरिम आवेदन पर छत्तीसगढ़ सरकार को जवाब प्रस्तुत करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। अब सरकार के जवाब के बाद मामले में आगे की सुनवाई होगी।

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Author: UnfearNews

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