
ओला शो-रूम पर उपभोक्ता आयोग सख्त: 45 दिन में स्कूटी नहीं सुधारी तो चुकानी होगी पूरी कीमत
लीगल डेस्क | बलौदा बाजार
लवन रोड स्थित Ola Electric बाइक शो-रूम की लापरवाही पर जिला उपभोक्ता आयोग बलौदा बाजार ने कड़ा रुख अपनाते हुए 45 दिनों के भीतर स्कूटी की संतोषजनक मरम्मत करने या वाहन का वर्तमान मूल्य चुकाने का आदेश दिया है। साथ ही उपभोक्ता को क्षतिपूर्ति देने के भी निर्देश दिए गए हैं।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बलौदा बाजार ने ओला इलेक्ट्रिक बाइक शो-रूम को सेवा में कमी का दोषी पाया। आयोग ने निर्देश दिया है कि शिकायतकर्ता के वाहन की पूर्ण संतुष्टि के साथ 45 दिनों के भीतर मरम्मत कर उसे वापस सौंपा जाए। निर्धारित अवधि में ऐसा नहीं करने पर शो-रूम को स्कूटी का वर्तमान बाजार मूल्य भुगतान करना होगा।

जानकारी के अनुसार, बलौदा बाजार निवासी घनेश्वर साहू ने अक्टूबर 2023 में उक्त शो-रूम से एचडीएफसी बैंक के माध्यम से फाइनेंस पर ओला इलेक्ट्रिक स्कूटी खरीदी थी। अप्रैल 2024 में वाहन में स्टार्टिंग की समस्या आई, जिसे शो-रूम द्वारा ठीक किया गया। इसके बाद भी वाहन में बार-बार खराबी आती रही और अगस्त 2024 में स्कूटी पूरी तरह बंद हो गई।

शिकायतकर्ता ने वाहन मरम्मत के लिए शो-रूम में जमा कराया, लेकिन शो-रूम की ओर से कभी रायपुर तो कभी अन्य स्थान भेजने की बात कहकर लंबे समय तक वाहन वापस नहीं किया गया। समस्या का समाधान नहीं होने और लगातार टालमटोल से परेशान होकर उपभोक्ता ने जिला उपभोक्ता आयोग में मामला दर्ज कराया।
मामले की सुनवाई के बाद आयोग के अध्यक्ष छमेश्वर लाल पटेल तथा सदस्य हरजीत सिंह चांवला और शारदा सोनी ने प्रस्तुत दस्तावेजों और नियमों का परीक्षण किया। आयोग ने सेवा में कमी मानते हुए शो-रूम को 45 दिनों के भीतर स्कूटी की संतोषजनक मरम्मत कर उपभोक्ता को सौंपने का निर्देश दिया है।
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इसके साथ ही आयोग ने आदेश दिया है कि निर्धारित समय में वाहन उपलब्ध नहीं कराए जाने की स्थिति में उसका वर्तमान मूल्य भुगतान किया जाए। साथ ही मानसिक एवं आर्थिक क्षति के लिए 7,000 रुपये तथा वाद-व्यय के रूप में 3,000 रुपये उपभोक्ता को देने के भी निर्देश दिए गए हैं।
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गौरतलब है कि ओला इलेक्ट्रिक स्कूटर से संबंधित तकनीकी समस्याओं को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में समय-समय पर उपभोक्ताओं द्वारा शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। हालांकि, प्रत्येक मामला अलग-अलग परिस्थितियों पर आधारित होता है और संबंधित मंच द्वारा तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाता है।
आयोग का यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है और सेवा प्रदाताओं के लिए जवाबदेही का स्पष्ट संदेश है।
Author: UnfearNews
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