
गांजा तस्करी पर न्यायालय का फैसला: तीन तस्करों को मिली 10-10 साल की सजा
लीगल डेस्क| बलौदा बाजार
अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए 65 किलो गांजा के अवैध परिवहन के मामले में तीन आरोपियों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और एक-एक लाख रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस) न्यायालय के इस फैसले से मादक पदार्थों की तस्करी करने वालों में कानून का डर बनाएगा।

बलौदा बाजार जिले की सिमगा पुलिस को 23 जुलाई 2019 को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई थी कि रायपुर से बिलासपुर की ओर एक इंडिगो कार क्रमांक OD 05 A 2088 और एक पिकअप वाहन क्रमांक CG 04 JC 0256 में कुछ लोग भारी मात्रा में गांजा लेकर जा रहे हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की और गजराज तालाब के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-130 पर नाकाबंदी कर दी।
नाकाबंदी के दौरान मुखबिर द्वारा बताए गए दोनों वाहनों को रोका गया और तलाशी ली गई। जांच में वाहनों से कुल 65 किलो गांजा बरामद किया गया। पुलिस ने मौके पर ही तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में नारायण साहू (28 वर्ष), निवासी ग्राम परतेवा थाना राजिम जिला गरियाबंद, निरंजन रात्रे निवासी ग्राम चौकबेड़ा थाना पटेवा जिला महासमुंद और विकास शर्मा, निवासी ग्राम तूसरा जिला बलांगीर (ओडिशा) शामिल थे।
सिमगा थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 20 (ii) (C) के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना पूर्ण की और प्रकरण को विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस) न्यायालय, बलौदा बाजार में प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष के तर्कों को सुनने के बाद न्यायालय ने आरोपियों को दोषी पाया।
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विशेष न्यायाधीश राकेश कुमार वर्मा ने तीनों आरोपियों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और प्रत्येक पर एक-एक लाख रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास का भी प्रावधान रखा गया है। प्रकरण में शासन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक संतोष कुमार कन्नौजे ने प्रभावी पैरवी की। इस निर्णय को मादक पदार्थों की तस्करी पर नियंत्रण और कानून के प्रति सख्ती का महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।
Author: UnfearNews
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