महानदी में छापा मारना पड़ा भारी: थानेदार को मिला सख्ती का “इनाम”, पहले ट्रांसफर फिर लाइन अटैच

महानदी में छापा मारना पड़ा भारी: थानेदार को मिला सख्ती का “इनाम”, पहले ट्रांसफर फिर लाइन अटैच

क्राइम रिपोर्टर|बलौदा बाजार

महानदी का सीना छलनी कर रेत का खनन करने वालों पर छापा मारना मानो जिले कप्तान को रास नहीं आया। सख्ती दिखाने वाले लवन थानेदार को महज 48 घंटे के भीतर पहले ट्रांसफर और फिर लाइन अटैच का आदेश थमा दिया गया। सवाल अब खुलकर उठ रहे हैं—क्या जिले में अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई करना ही सबसे बड़ा “अपराध” बन गया है? अगर नियम लागू करने वाले अधिकारियों की यही नियति होगी, तो क्या यह संदेश नहीं जाएगा कि माफिया से टकराने का इनाम कीमत कुर्सी से चुकानी पड़ेगी?

महानदी में छापा मारना पड़ा भारी: थानेदार को मिला सख्ती का “इनाम”, पहले ट्रांसफर फिर लाइन अटैच
पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी आदेश की कॉपी।

जिले में अवैध रेत खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के कुछ घंटे के भीतर ही लवन थाना प्रभारी प्रमोद सिंह पर ही प्रशासनिक गाज गिरने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। लवन थाना प्रभारी रहे निरीक्षक प्रमोद कुमार सिंह को पहले राजदेवरी स्थानांतरित किया गया और फिर ज्वाइन करने से पहले ही महज कुछ घंटों के भीतर पुलिस अधीक्षक ने दूसरा आदेश जारी कर उन्हें लाइन अटैच कर दिया।
हालांकि दोनों आदेशों में कारण “प्रशासनिक” बताया गया है, लेकिन कार्रवाई के तुरंत बाद हुई इस तेज प्रशासनिक हलचल ने पूरे घटनाक्रम को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।

सूत्रों के अनुसार, निरीक्षक प्रमोद कुमार सिंह एक माह पहले ही लवन थाना का प्रभार संभाले थे। रायपुर में धारदार कार्रवाई के कारण उन्हें वहां भी कार्रवाई झेलनी पड़ी थी। लेकिन जब उनका तबादला बलौदा बाजार जिले में हुआ तो यहां अवैध कारोबार करने वालों में हलचल तेज हो गई। इधर अपने व्यवहार के अनुरूप उन्होंने लवन थाना का प्रभार संभालते ही पहले गुंडा बदमाशों पर कार्रवाई की और अवैध खनन की शिकायत मिलने पर दो दिन पहले उन्होंने लवन थाना क्षेत्र में बहने वाली महानदी से अवैध रेत खनन और ओवरलोड परिवहन कर रहे हाइवा व ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया था। महानदी क्षेत्र में लंबे समय से जारी अवैध उत्खनन पर यह बड़ी कार्रवाई मानी जा रही थी।
लेकिन कार्रवाई के तुरंत बाद पहले उनका तबादला राजदेवरी कर दिया गया और फिर नया आदेश जारी कर उन्हें पुलिस लाइन अटैच कर दिया गया। दो दिनों में दो आदेश जारी होने से प्रशासनिक अमले में भी हलचल तेज हो गई है।

प्रमोद को मिली सख्ती की सजा

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिले में जब भी कोई अधिकारी अवैध खनन के खिलाफ सख्ती दिखाता है, उसे पद से हटा दिया जाता है। इससे पहले कांग्रेस सरकार में तहसीलदार नीलमणि दुबे ने कथित तौर पर कांग्रेस पार्टी से जुड़े कुछ लोगों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की थी, जिनपर भी कुछ घंटे के भीतर लवन में कार्रवाई करते हुए उन्हें तहसीलदार के पद से हटा दिया गया था। इधर स्थानीय लोगों का कहना है कि अब थानेदार के ऊपर हुई इस तरह की कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि नियमों का पालन करवाने वाले अधिकारी को ही परिणाम भुगतना पड़ता है।
लोगों का यह भी कहना है कि अगर कार्रवाई करने वाले अधिकारियों पर ही कार्रवाई होती रही तो भविष्य में कोई भी अधिकारी जोखिम लेकर अवैध खनन पर सख्त कदम उठाने से कतराएगा। इसका सीधा लाभ अवैध खनन और परिवहन में लगे तत्वों को मिलेगा और उनका नेटवर्क और मजबूत होगा।

कार्रवाई की जानकारी तक सार्वजनिक नहीं की गई

पुलिस के तरफ से छोटे छोटे मामले में विज्ञप्ति जारी की जाती है। मीडिया में हर तरह की रिपोर्ट छपे और दिखे इसके लिए वीडियो फोटो जारी करने के लिए जिला पुलिस और मीडिया का बाकायदा व्हाट्सएप का ग्रुप बना हुआ है, लेकिन लवन थानेदार रहे प्रमोद सिंह द्वारा की गई कार्रवाई का कोई विवरण पिछले तीन दिन में जारी नहीं किया गया। हालांकि इस कार्इरवाईकी पुष्टि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने मीडिया को की है, खुद इंस्पेक्टर प्रमोद सिंह भी पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने इस बात को स्वीकार किए हैं कि 7 गाड़ियों पर उन्होंने कार्रवाई की है, जिसमें कुछ ने ट्रैक्टर ट्राली थी, जिसे खींचकर लाया गया था। लेकिन इसके बाद भी पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी होने वाली जानकारी में इस बात की जानकारी नहीं दी गई। उल्टे ट्रांसफर आदेश और उसके बाद थानेदार को लाइन अटैच किए जाने का आदेश अब सामने आ गया है। इसके कारण भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि थानेदार ने उन संरक्षित खनन माफिया के गिरेबान में तो हाथ नहीं डाल दिया जिन्हें पुलिस अधीक्षक कार्यालय से पोषित किया जाता है? अवैध कारोबार को संरक्षण देने वाले अधिकारियों के खिलाफ तो यह नहीं हो गई? जिसके कारण मजबूरन पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता को थानेदार के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ी।

टास्क फोर्स की भूमिका पर भी सवाल

जिले में अवैध खनन रोकने के लिए टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जिसमें राजस्व, खनिज और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम शामिल है। उद्देश्य स्पष्ट था कि टास्क फोर्स बनाने से अवैध उत्खनन और परिवहन पर प्रभावी रोक लगेगा, लेकिन अब आरोप लग रहे हैं कि जब इसी तंत्र का हिस्सा रहे पुलिस अधिकारी कार्रवाई करते हैं तो उन्हें ही हटा दिया जाता है। ऐसे में टास्क फोर्स की प्रभावशीलता और गंभीरता पर भी प्रश्नचिह्न लगने लगे हैं।

कौन दे रहा माफिया को संरक्षण

क्षेत्र में चर्चा है कि थानेदार को हटाने की कार्रवाई कहीं न कहीं अवैध खनन में लगे लोगों के लिए सकारात्मक संकेत की तरह देखी जा रही है। हालांकि प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आदेश में तबादले को “प्रशासनिक कारणों” से किया जाना उल्लेखित है, लेकिन घटनाक्रम की टाइमिंग को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। आखिर कौन है जो अवैध खनन को जारी रखना चाहता है? कौन खनन माफिया को संरक्षण दे रहा है। जिले के अधिकारियों पर भरोसा खत्म हो रहा है, उनपर माफिया को संरक्षण देने का आरोप लग रहा है।

प्रशासनिक अमले में भी हलचल तेज

दो दिनों में दो आदेश जारी होने से विभागीय स्तर पर भी चर्चा तेज है। सूत्रों का कहना है कि लगातार आदेशों ने प्रशासनिक अमले में असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या अवैध खनन के खिलाफ अभियान उसी तीव्रता से जारी रहेगा या फिर यह घटनाक्रम अधिकारियों के मनोबल को प्रभावित करेगा।

हर गाड़ी से हो रही वसूली चर्चा

बलौदा बाजार जिले में आम चर्चा है कि बलौदा बाजार से गुजरने वाली तमाम मालवाहक गाड़ियों से पुलिस और आरटीओ द्वारा वसूली की जा रही है। बलौदा बाजार जिले की गाड़ियों से 3 हजार और दूसरे जिलों की गाड़ियों से 5 हजार रुपए वसूलने की चर्चा हो रही है। इसके लिए तर्क दिए जा रहे हैं कि इसी वजह से हर दिन सैकड़ों गाड़ियां ओवरलोडिंग ढुलाई कर रही हैं। हालांकि अभी तक इसका कोई आधिकारिक वीडियो सामने नहीं आया है, लेकिन जिले के  अधिकारियों के बीच भी इस बात की चर्चा है, कि यहां वसूली हो रही है।

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आरटीओ गायब, कर्मचारी संभाल रहे वसूली का कमान, हर दिन लगता है लाहौद में कैंप

इधर यह भी चर्चा का विषय है कि बलौदा बाजार जिले के आरटीओ अधिकारी पर दोहरा प्रभार है। रायपुर और बलौदा बाजार जिले के प्रभार संभालने के कारण वे माह में कभी कभार ही अपने कार्यालय में बैठते हैं। इसके कारण विभाग के कर्मचारी ही पूरा वसूली का मोर्चा संभाल रहे हैं, ओवर लोडिंग गाड़ियां सड़कों पर दौड़कर सड़कों को जर्जर कर रही हैं और उनपर कोई व्यापक कार्रवाई नहीं हो रही है। आरटीओ का लाहौद में कैंप लगता तो है, लेकिन अवैध खनन, परिवहन और ओवरलोडिंग पर कभी व्यापक कार्रवाई की गई हो इसकी जानकारी अब तक साझा नहीं की गई।

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Author: UnfearNews

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