
प्रशासनिक डेस्क| बलौदा बाजार
छत्तीसगढ़ में राजस्व प्रकरणों की बढ़ती संख्या और देरी से लोग परेशान हैं। सबसे ज्यादा खराब स्थिति उस समय राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा के गृह जिले में निर्मित हो गई जब एक किसान सुहेला तहसील कार्यालय का चक्कर काट काट कर परेशान हो गया।आरोप है कि हर बार किसान को न्याय की जगह नई तारीख मिलती रही। यहां तक कि इस तारीख पर तारीख मिलने से परेशान होकर किसान ने न्याय की आस में भटकते एक किसान ने जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास किया।
बलौदा बाजार जिले के किसान का आरोप था कि उसकी जमीन पर अवैध कब्जा हो गया है। इसको लेकर वह पहले से परेशान था, तहसील कार्यालय में जब मामला लगाया तो यहां भी मामला वर्षों से लंबित है। प्रशासन से उसने न्याय की उम्मीद लिए बैठा था, लेकिन उसे न्याय की जगह हर बार तारीख पर तारीख मिलती रही, जिसके कारण वह मानसिक रूप से टूट चुका है। बता दें कि तहसील कार्यालय में जहर खाने की घटना के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया। किसान की तबीयत बिगड़ते देख मौके पर मौजूद अधिकारियों और ग्रामीणों ने किसान को तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज जारी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम बुढ़गहन निवासी हीरालाल साहू अपनी कृषि भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर कई वर्षों से न्याय के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर काट रहा था। उसने तहसीलदार से कई बार गुहार लगाई, लेकिन उसे हर बार अगली तारीख देकर टाल दिया जाता रहा। बुधवार को जब वह फिर से सुहेला तहसील कार्यालय पहुंचा, तो उसे फिर से एक नई तारीख दे दी गई। इससे हताश होकर उसने तहसील परिसर के बाहर ही जहर खा लिया। घटना के तुरंत बाद वहां मौजूद लोगों और तहसील कर्मियों ने किसान को उठाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुहेला में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने बताया कि हीरालाल की हालत गंभीर बनी हुई थी, लेकिन समय पर इलाज मिलने के कारण उसकी स्थिति स्थिर है। हालांकि, वह अभी भी खतरे से बाहर नहीं है।
इस घटना ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का कहना है कि उनकी समस्याओं का समाधान केवल कागजों तक सीमित रह गया है। हर बार उन्हें केवल आश्वासन दिया जाता है, लेकिन जमीन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और पीड़ित किसान को न्याय मिल पाता है या नहीं।
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
किसान द्वारा आत्महत्या के प्रयास के बाद ग्रामीणों और किसानों में आक्रोश फैल गया है। राजस्व प्रकरणों के निपटारे में देरी का प्रशासन के ऊपर आरोप लग रहे हैं। कहा जा रहा है कि छोटे छोटे मामलों में भी कई कई साल न्याय नहीं मिलता। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते किसान की समस्या का समाधान किया होता, तो यह घटना टल सकती थी। किसान पहले से ही आर्थिक और मानसिक दबाव में होते हैं, ऐसे में प्रशासनिक लापरवाही उनकी स्थिति को और बदतर बना रही है।
फाइलों में दिख रही कार्रवाई
ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारी केवल फाइलों में कार्रवाई दिखाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस समाधान नहीं होता। यदि तहसीलदार और अन्य संबंधित अधिकारियों ने संवेदनशीलता दिखाई होती, तो किसान को इतना बड़ा कदम नहीं उठाना पड़ता।
राजनीतिक हलकों में उबाल, कांग्रेस ने सरकार को घेरा
इस घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष हितेन्द्र ठाकुर ने इस घटना पर प्रशासन और सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि राजस्व मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में किसानों को न्याय नहीं मिल रहा। यह सरकार की नाकामी और मंत्री की असफलता को दर्शाता है। प्रशासन की लापरवाही और सरकार की संवेदनहीनता के कारण ही किसानों को आत्महत्या जैसा कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
कलेक्टर पहुंचे अस्पताल, दिए जांच के आदेश
घटना की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर दीपक सोनी खुद जिला अस्पताल बलौदा बाजार पहुंचे, जहां उन्होंने भर्ती किसान हीरालाल साहू से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने डॉक्टरों को बेहतर इलाज के निर्देश दिए और कहा कि किसान को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। कलेक्टर ने इस मामले की जांच के लिए एसडीएम सिमगा अंशुल वर्मा को निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा, कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
Author: UnfearNews
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