सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस होंगे कृष्णा राम महापात्र, यहां से राजस्थान जाएंगे जस्टिस संजय के. अग्रवाल

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस होंगे कृष्णा राम महापात्र, यहां से राजस्थान जाएंगे जस्टिस संजय के. अग्रवाल

लीगल रिपोर्टर|बिलासपुर
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 31 अगस्त 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के लिए ओडिशा हाईकोर्ट के जस्टिस कृष्णा राम महापात्र को जबकि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस संजय के. अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की है। हालांकि अंतिम नियुक्ति केंद्र सरकार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगी।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस होंगे कृष्णा राम महापात्र, यहां से राजस्थान जाएंगे जस्टिस संजय के. अग्रवाल

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश के रूप में प्रस्तावित जस्टिस कृष्णा राम महापात्र का जन्म 18 अप्रैल 1965 को हुआ है। उन्होंने बीए और एलएलबी की शिक्षा प्राप्त की है और 7 फरवरी 1988 को ओडिशा स्टेट बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में पंजीयन कराया था। करीब 26 वर्षों तक उन्होंने सिविल, सर्विस, क्रिमिनल और संवैधानिक मामलों समेत कानून की विभिन्न शाखाओं में वकालत की। 17 अप्रैल 2015 को उन्हें ओडिशा हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया। जस्टिस महापात्र के पिता स्वर्गीय जस्टिस शरत चंद्र महापात्र भी न्यायिक सेवा से जुड़े रहे हैं। वहीं जस्टिस संजय के. अग्रवाल सितंबर 2013 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश बने थे और मार्च 2016 में स्थायी न्यायाधीश नियुक्त हुए। अब उन्हें राजस्थान हाईकोर्ट की कमान देने की सिफारिश की गई है। हालांकि बताया जा रहा है कि यह फैसला राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा से जुड़े प्रशासनिक विवाद और वकीलों के विरोध-प्रदर्शन के बाद आया है। इस लिहाज से जस्टिस संजय के अग्रवाल के लिए पदभार ग्रहण करने के बाद बार और बेंच के बीच सही समन्वय बने और दोनों कड़ी न्याय दिलाने में पीड़ितों और जरूरतमंदों के काम आ सकें इसके लिए जद्दोजहद करना पड़ेगा।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में 22 पद स्वीकृत, 12 जजों के पद खाली

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के 22 पद स्वीकृत हैं। 31 अगस्त 2026 की स्थिति में हाईकोर्ट में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या 11 है। इसमें से जस्टिस संजय के. अग्रवाल का तबादला हो जाने की सिफारिश के बाद अब 12 पद खाली हो जाएंगे। वहीं हाईकोर्ट में लंबित मामलों की बात करें तो 73 हजार से अधिक मामले लंबित हैं। इधर लंबे समय से चली आ रही न्यायाधीशों की कमी के बीच सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के आदेश ने एक बार फिर न्यायिक व्यवस्था में रिक्त पदों का मुद्दा सामने ला दिया है।
इधर 4 सितंबर को मौजूदा मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रमेश सिन्हा के सेवानिवृत्त होने के बाद उनकी जगह ओडिशा हाईकोर्ट के जस्टिस कृष्णा राम महापात्र को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश पहले ही हो चुकी है। इसलिए चीफ जस्टिस के पद पर बदलाव से कुल संख्या में अलग से कमी नहीं होगी, लेकिन संजय के. अग्रवाल के राजस्थान जाने से एक स्वतंत्र न्यायिक पद जरूर खाली होगा।

राहत की कोशिश भी हुई, तीन नए जजों की सिफारिश

दिलचस्प बात यह है कि जजों की कमी के बीच सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 18 अगस्त 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के लिए तीन न्यायिक अधिकारियों—संतोष शर्मा, सुषमा सावंत और सुधीर कुमार—को जज बनाने की सिफारिश की थी। सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम वेबसाइट पर यह सिफारिश दर्ज है। लेकिन जब तक इन नामों को मंजूरी देकर नियुक्ति की अधिसूचना जारी नहीं होती, इन्हें हाईकोर्ट की कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या में नहीं जोड़ा जा सकता।
यदि तीनों की नियुक्ति होती है और उसी दौरान जस्टिस संजय के. अग्रवाल राजस्थान चले जाते हैं, तो भी 22 स्वीकृत पदों के मुकाबले करीब 14 न्यायाधीश ही उपलब्ध होंगे। यानी लगभग 8 पद फिर भी खाली रह सकते हैं।

छत्तीसगढ़ से दूसरे हाईकोर्ट की कमान संभालने वाले जजों की लंबी कहानी

जस्टिस संजय के. अग्रवाल का मामला पहली बार नहीं है, जब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के किसी न्यायाधीश को दूसरे हाईकोर्ट की कमान मिली हो।
जस्टिस नविन सिन्हा: जस्टिस नविन सिन्हा जुलाई 2014 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट आए थे। उन्होंने यहां कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में काम किया और बाद में 9 अप्रैल 2015 से 11 मई 2016 तक छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे। इसके बाद उनका राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में स्थानांतरण हुआ। भारत सरकार की अधिसूचना में भी उन्हें छत्तीसगढ़ के मुख्य न्यायाधीश से राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद पर स्थानांतरित किए जाने का उल्लेख है। बाद में वे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश भी बने।
जस्टिस मनींद्र मोहन श्रीवास्तव: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मनींद्र मोहन श्रीवास्तव का भी करियर इसी तरह आगे बढ़ा। वे 10 दिसंबर 2009 से 17 अक्टूबर 2021 तक छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायाधीश रहे। इसके बाद उनका राजस्थान हाईकोर्ट तबादला हुआ। वहां वे कई बार कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे और 6 फरवरी 2024 को राजस्थान हाईकोर्ट के स्थायी मुख्य न्यायाधीश बने। बाद में जुलाई 2025 में उन्हें मद्रास हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया।
जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर: जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर भी छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से दूसरे हाईकोर्ट की कमान संभालने वाले प्रमुख नाम हैं। वे 31 मार्च 2009 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायाधीश बने और 3 अक्टूबर 2018 को उनका इलाहाबाद हाईकोर्ट में तबादला हुआ। बाद में वे इलाहाबाद हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बने और फिर मुख्य न्यायाधीश नियुक्त हुए।

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा: एक और बड़ा नाम जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा का है। वे 10 दिसंबर 2009 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायाधीश बने और जून 2021 से अक्टूबर 2021 तक छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे। इसके बाद उन्हें आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। आगे चलकर 19 मई 2023 को वे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने।

यह भी पढ़ें 👉 https://unfearnews.com/16757

एक तरफ छत्तीसगढ़ के जजों को मिल रही बड़ी जिम्मेदारियां, दूसरी तरफ अपने हाईकोर्ट में कमी

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के इतिहास पर नजर डालें तो यहां से कई न्यायाधीश दूसरे हाईकोर्ट में पहुंचे और मुख्य न्यायाधीश बने। यह छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की न्यायिक प्रतिभा और वरिष्ठता को दर्शाता है। लेकिन मौजूदा स्थिति में दूसरा पहलू भी महत्वपूर्ण है। 22 स्वीकृत पदों वाले हाईकोर्ट में करीब 12 न्यायाधीशों का प्रभावी कार्यबल और 73 हजार से अधिक लंबित मामले न्यायिक व्यवस्था पर दबाव को दर्शाते हैं।

UnfearNews
Author: UnfearNews

हम बनेंगे आपकी समस्या का आवाज बिना डरे, बिना भेदभाव किए...