जागरूकता ही बचाव है: एनआईटी रायपुर में ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता शिविर

जागरूकता ही बचाव है: एनआईटी रायपुर में ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता शिविर

महिलाओं में बढ़ते ब्रेस्ट कैंसर के मामलों को देखते हुए राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर में एक विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने शीघ्र पहचान, स्वयं जांच और स्वस्थ जीवनशैली को जीवनरक्षक बताते हुए युवाओं से समाज में जागरूकता फैलाने की अपील की।

एजुकेशन डेस्क|रायपुर

महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे ब्रेस्ट कैंसर को लेकर जागरूकता फैलाने की दिशा में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। द डियर फाउंडेशन, स्विट्जरलैंड के सहयोग से आयोजित इस विशेष शिविर में विशेषज्ञों ने शीघ्र पहचान, स्वयं जांच और स्वस्थ जीवनशैली को जीवनरक्षक बताया।

जागरूकता ही बचाव है: एनआईटी रायपुर में ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता शिविर
कार्यक्रम में शामिल डॉक्टर और विशेषज्ञ।

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर द्वारा द डियर फाउंडेशन, स्विट्ज़रलैंड के सहयोग से ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता कैंप का आयोजन किया गया। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं और युवाओं को ब्रेस्ट कैंसर के प्रति सजग करना, समय पर पहचान को बढ़ावा देना तथा निवारक देखभाल के प्रति लोगों को प्रेरित करना था।

जागरूकता ही बचाव है: एनआईटी रायपुर में ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता शिविर
कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागी।

कार्यक्रम में डॉ. समीर बाजपेई, निदेशक (प्रभारी), एनआईटी रायपुर, सोनजा डिनर, अध्यक्ष, द डियर फाउंडेशन, स्विट्ज़रलैंड, सेविम अराज़, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, द डियर फाउंडेशन, स्विट्ज़रलैंड, डॉ. अजय भटनागर, वैज्ञानिक सलाहकार, द डियर फाउंडेशन, स्विट्ज़रलैंड, डॉ. सौरभ तिवारी, मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, बाल्को कैंसर सेंटर तथा श्रीमती ज्योति रमना राव उपस्थित रहे।

जागरूकता ही बचाव है: एनआईटी रायपुर में ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता शिविर
ब्रेस्ट कैंसर पर व्याख्यान देते विशेषज्ञ।

इसके अलावा डॉ. एन. डी. लोंढे, रजिस्ट्रार, एनआईटी रायपुर, डॉ. सुधाकर पांडे, अध्यक्ष, हेल्थकेयर एडवाइजरी कमेटी, डॉ. अनूप कुमार तिवारी, अध्यक्ष, ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता कैंप, तथा डॉ. मृदु साहू, कार्यक्रम समन्वयक सहित बड़ी संख्या में फैकल्टी सदस्य और छात्र-छात्राएं भी शामिल हुए।
शिविर की शुरुआत में डॉ. अनूप कुमार तिवारी ने अतिथियों का परिचय देते हुए फाउंडेशन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। डॉ. समीर बाजपेई ने कहा कि ऐसे स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम समाज में निवारक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूती देते हैं। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे जागरूकता के संदेशवाहक बनें, क्योंकि एक जागरूक विद्यार्थी हजारों लोगों तक सही जानकारी पहुंचा सकता है।

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सोनजा डिनर ने बताया कि भारत में ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी चिंता का विषय है, लेकिन समय पर पहचान से इसे काफी हद तक रोका जा सकता है। उन्होंने महिलाओं को महीने में एक बार स्वयं जांच करने और किसी भी असामान्यता पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी। इस दौरान विशेषज्ञों ने ‘डियर यू’ मोबाइल ऐप की जानकारी भी साझा की, जो स्वयं जांच की प्रक्रिया सीखने में सहायक है।
डॉ. अजय भटनागर ने कहा कि ब्रेस्ट कैंसर से मृत्यु का प्रमुख कारण डर और जानकारी की कमी है। उन्होंने बताया कि अधिकतर मरीज दूसरे या तीसरे चरण में अस्पताल पहुंचते हैं, जबकि शुरुआती पहचान से इलाज की सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने गांठ या कठोर उभार जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करने की अपील की।

डॉ. सौरभ तिवारी ने कहा कि ब्रेस्ट कैंसर केवल एक महिला नहीं बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है। उन्होंने स्वयं परीक्षण के महत्व पर जोर देते हुए बताया कि यदि टेनिस बॉल या अखरोट जैसी कठोर गांठ महसूस हो, त्वचा मोटी हो जाए या असामान्य रक्तस्राव दिखाई दे, तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।

कार्यक्रम के समापन पर विशेषज्ञों ने संतुलित आहार, फल-सब्जियों और साबुत अनाज का सेवन, धूम्रपान एवं शराब से दूरी, स्वस्थ वजन बनाए रखने और नियमित स्वयं जांच को जरूरी बताया। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में संदेश दिया कि —जागरूकता ही बचाव है।

अंत में आयोजित फीडबैक सत्र में प्रतिभागियों ने कैंसर से जुड़े सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से जवाब दिया। डॉ. मृदु साहू के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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Author: UnfearNews

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