6 मजदूरों की मौत से जागा प्रशासन: रियल इस्पात हादसे के बाद जिले की हर फैक्ट्री की होगी सुरक्षा जांच

6 मजदूरों की मौत से जागा प्रशासन: रियल इस्पात हादसे के बाद जिले की हर फैक्ट्री की होगी सुरक्षा जांच

प्रशासनिक रिपोर्टर|बलौदा बाजार

छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले के ग्राम बकुलाही स्थित रियल इस्पात एंड एनर्जी प्लांट में हुए भीषण औद्योगिक हादसे में छह श्रमिकों की मौत के बाद अब जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। कलेक्टर दीपक सोनी ने जिले की सभी औद्योगिक इकाइयों में अनिवार्य रूप से सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश जारी किए हैं, ताकि सुरक्षा मानकों की समीक्षा कर भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

6 मजदूरों की मौत से जागा प्रशासन
रियल इस्पात प्लांट जहां हादसा हुआ था।

तहसील भाटापारा अंतर्गत आने वाले ग्राम बकुलाही स्थित रियल इस्पात एंड एनर्जी प्लांट में विगत माह 22 जनवरी को हुई औद्योगिक दुर्घटना में कोयले की गर्म राख में झुलस कर जहां 6 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई थी वहीं 5 अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद जिला प्रशासन ने औद्योगिक सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर दीपक सोनी ने जिले में संचालित सभी प्रमुख औद्योगिक इकाइयों में सेफ्टी ऑडिट कराना अनिवार्य करते हुए कारखाना प्रबंधकों को इसकी अद्यतन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए हैं।

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जारी आदेश के तहत अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड रावन, हिरमी, सेमराडीह, अंबुजा सीमेंट लिमिटेड रवान, नु विस्टा लिमिटेड रिसदा, श्री रायपुर सीमेंट प्लांट खपराडीह, न्यूवोको विस्टास कॉर्पोरेशन लिमिटेड रसेड़ा, ए.पी.एल. अपोलो बिल्डिंग प्रोडक्ट्स प्रा.लि. रिंगनी, रियल इस्पात एंड एनर्जी प्रा.लि. बकुलाही और अनिमेष इस्पात प्रा.लि. खजुरी के प्रबंधकों को सुरक्षा संपरीक्षा से संबंधित पूरी जानकारी निर्धारित समय में देने को कहा गया है।

संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी है सेफ्टी ऑडिट

सेफ्टी ऑडिट किसी भी औद्योगिक इकाई में जोखिमों की पहचान करने, उपकरणों की स्थिति जांचने, कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था का मूल्यांकन करने और संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए किया जाता है। इसके तहत मशीनों की फिटनेस, फायर सेफ्टी सिस्टम, गैस या रसायनों का भंडारण, आपातकालीन निकास मार्ग, सुरक्षात्मक उपकरणों की उपलब्धता और कर्मचारियों के प्रशिक्षण जैसे बिंदुओं की गहन जांच होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक समय-समय पर ऑडिट न होने से छोटी-छोटी तकनीकी खामियां बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन सकती हैं। वहीं, ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर सुधारात्मक कदम उठाकर जान-माल के नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।

पुराने हादसों से मिला सबक

जिले और प्रदेश के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में पूर्व में हुए हादसों ने यह स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी घातक हो सकती है। कहीं बॉयलर फटने से मजदूर झुलस गए, तो कहीं गैस रिसाव के कारण कई कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हुए। कुछ मामलों में आग लगने से उत्पादन इकाइयों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा और कामगारों की जान तक चली गई। प्रशासन का मानना है कि यदि ऐसे प्रतिष्ठानों में समय रहते सेफ्टी ऑडिट कराए जाते और जरूरी सुधार लागू किए जाते, तो कई घटनाओं को टाला जा सकता था। रियल इस्पात प्लांट में हाल में हुई दुर्घटना के बाद भी इसी दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत महसूस की गई। क्योंकि रियल इस्पात प्लांट में सुरक्षा की गंभीर लापरवाही देखने को मिली थी।

प्रशासन की चेतावनी: सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं

कलेक्टर दीपक सोनी ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिन इकाइयों में कमियां पाई जाएंगी, वहां सुधार कार्य अनिवार्य रूप से कराए जाएंगे और लापरवाही सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई भी की जा सकती है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार सेफ्टी ऑडिट का उद्देश्य उद्योगों को बाधित करना नहीं, बल्कि कामगारों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उत्पादन व्यवस्था को सुरक्षित और स्थायी बनाना है।

कामगारों को मिलेगा लाभ

इस फैसले से जिले के विभिन्न कारखानों में काम करने वाले हजारों श्रमिकों को सुरक्षित कार्य वातावरण मिलने की उम्मीद है। साथ ही, औद्योगिक इकाइयों में जोखिम कम होने से उत्पादन में निरंतरता बनी रहेगी और दुर्घटनाओं से होने वाले आर्थिक नुकसान से भी बचा जा सकेगा। जिले में शुरू किए गए इस अभियान को औद्योगिक सुरक्षा की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

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Author: UnfearNews

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