दिव्यांग शिक्षा में अहम योगदान: बिलासपुर के 4 शिक्षक हुए राज्यपाल से सम्मानित

दिव्यांग शिक्षा में अहम योगदान: बिलासपुर के 4 शिक्षक हुए राज्यपाल से सम्मानित

दिव्यांग शिक्षा में अहम योगदान: बिलासपुर के 4 शिक्षक हुए राज्यपाल से सम्मानित

एजुकेशन डेस्क| रायपुर

दिव्यांग विद्यार्थियों की शिक्षा को सुलभ और प्रभावी बनाने के लिए किए जा रहे नवाचारों के तहत रायपुर स्थित लोकभवन में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में बिलासपुर जिले के चार शिक्षकों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए राज्यपाल रामेन डेका द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर पर दो ब्रेल पुस्तकों और 3000 से अधिक ऑडियो बुक्स का विमोचन भी किया गया, जिससे दृष्टिबाधित छात्रों को एक ही मंच पर संपूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध हो।

दिव्यांग शिक्षा में अहम योगदान: बिलासपुर के 4 शिक्षक हुए राज्यपाल से सम्मानित
सम्मान प्राप्त करते बिलासपुर के शिक्षक।

दिव्यांगजनों के शैक्षणिक सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे सराहनीय प्रयासों के तहत राजधानी रायपुर स्थित लोकभवन, सिविल लाइन में एक गरिमामय कार्यक्रम किया गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रामेन डेका से “दिव्यांग महिलाओं की सफलता की कहानी” और “छत्तीसगढ़ के वीर” नामक ब्रेल पुस्तकों का विधिवत विमोचन किया गया।
कार्यक्रम में दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए तैयार की गई 3000 से अधिक ऑडियो बुक्स का भी विमोचन किया गया। जिनमें कक्षा छठवीं से बारहवीं तक के सभी विषयों के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष प्लेलिस्ट शामिल हैं। इन ऑडियो सामग्रियों में सामान्य ज्ञान, सरगुजिया कहानियां, छत्तीसगढ़ी व हिंदी भाषा के पाठ, हल्बी और पंजाबी भाषाओं की अलग-अलग प्लेलिस्ट के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण, दिव्यांगजनों के लिए सरकारी योजनाओं और सहायक संसाधनों से जुड़ी उपयोगी जानकारियां भी उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे दृष्टिबाधित विद्यार्थी एक ही मंच पर संपूर्ण अध्ययन सामग्री प्राप्त कर सकें।

दिव्यांग शिक्षा में अहम योगदान: बिलासपुर के 4 शिक्षक हुए राज्यपाल से सम्मानित
राज्यपाल रामेन डेका के हाथों सम्मान प्राप्त करते हुए शिक्षक।

इस अभिनव पहल की प्रेरणा दुर्ग जिले की शिक्षिका के. शारदा को वर्ष 2024 में राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त होने के बाद मिली। दृष्टिबाधित बच्चों से संवाद के दौरान उन्होंने महसूस किया कि वे मुख्य रूप से ऑडियो माध्यम से पढ़ाई करते हैं, जिसके बाद शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने का विचार सामने आया। 25 अक्टूबर 2024 से शुरू हुए इस अभियान में के. शारदा ने स्वयं 800 से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार कीं। बाद में विभिन्न जिलों के शिक्षकों को जोड़ते हुए यह संख्या बढ़कर 3100 से अधिक तक पहुंच गई, जो वर्ल्ड ऑडियो बुक यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध हैं। यह पूरा कार्य सेवा भावना और स्वैच्छिक सहभागिता से किया गया।

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कार्यक्रम में इस पुनीत कार्य में योगदान देने वाले शिक्षकों को राज्यपाल द्वारा सम्मानित किया गया। इस अभियान में राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित शिक्षिका प्रीति शांडिल्य की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उल्लेखनीय है कि पूर्व में के. शारदा और प्रीति शांडिल्य द्वारा संयुक्त रूप से ब्रेल पुस्तकों का निर्माण कर राज्य के 20 ब्रेल स्कूलों को 100-100 प्रतियां स्वयं के व्यय पर निःशुल्क उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।
तीस शिक्षकों के समूह में बिलासपुर जिले से चार शिक्षकों — शांति सोनी व्याख्याता, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय महमंद, चानी एरी शिक्षक, सेजस पंधी, अमरदीप भोगल सहायक शिक्षक, शासकीय प्राथमिक शाला जांजी और सुशील पटेल व्याख्याता, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मिट्ठूनवागांव — को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए राज्यपाल रामेन डेका द्वारा सम्मानित किया गया।
इस आयोजन ने स्पष्ट किया कि सामूहिक प्रयास और सेवा भावना से शिक्षा को हर वर्ग तक पहुंचाया जा सकता है, और यह पहल दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के भविष्य को नई दिशा देने वाली साबित हो रही है।

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Author: UnfearNews

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