
अनिश्चितकालीन हड़ताल: एक महीना बाद भी संविदा स्वास्थ्य कर्मियों का प्रदर्शन जारी, बर्खास्तगी नोटिस के जवाब में बोले कर्मचारी – हम तो इस्तीफा दे चुके हैं!
अनिश्चितकालीन हड़ताल: एक महीना बाद भी संविदा स्वास्थ्य कर्मियों का प्रदर्शन जारी, बर्खास्तगी नोटिस के जवाब में बोले कर्मचारी – हम तो इस्तीफा दे चुके हैं! जानिए क्या है पूरा मामला।
हेल्थ रिपोर्टर| बलौदा बाजार
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से स्वास्थ्य केंद्रों पर काम बंद है। बीमारों और मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। बिगड़ते हालात के बीच सरकार और कर्मचारियों के बीच कई दौर की बातचीत का कोई परिणाम नहीं निकलने से नाराज सरकार ने जहां संघ के शीर्ष नेतृत्व करने वाले 50 कर्मचारी नेताओं को बर्खास्त कर दिया था। इससे कर्मचारियों का आंदोलन और भड़क गया, कर्मचारियों ने संघ के नेताओं के समर्थन में अपना सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया था। सरकार की सख्ती के बाद भी कर्मचारियों के काम पर नहीं लौटने से नाराज सरकार अब अंतिम नोटिस के रूप में नोटिस जारी किया है। इसमें कहा गया है कि वे काम पर लौट अन्यथा उन्हें बर्खास्त कर दिया जाएगा। वहीं इसके जवाब में कर्मचारियों कहना है कि वे पहले ही अपना सामूहिक इस्तीफा दे चुके हैं।

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छत्तीसगढ़ प्रदेश में पदस्थ 16000 संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की 10 सूत्रीय मांगों को लेकर चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल को एक महीना पूरा हो चुका है। लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। इस हड़ताल के कारण राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है, ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में ताले लटके हैं, और मरीज दर-दर भटकने को मजबूर हैं। हालत यह है कि कई जिलों के जिला अस्पताल भी अब रेफर सेंटर में तब्दील हो चुके हैं। इधर हालात को नियंत्रण में लेने के तमाम प्रयास असफल होने के बाद बिगड़ते हालात को देख सरकार अब हड़ताली कर्मचारियों के ऊपर सख्ती बरत रही है। कर्मचारियों को नोटिस जारी कर एक माह के भीतर काम पर लौटने के निर्देश दिए हैं, यह भी कहा गया है कि अगर वह काम पर नहीं लौटे तो उन्हें बर्खास्त कर दिया जाएगा। इसके जवाब में कर्मचारियों ने कहा कि वे तो पहले ही सामूहिक इस्तीफा दे चुके हैं अब सरकार उन्हें बर्खास्त करे या काम पर रखे यह सरकार की मर्जी है। वे काम पर अब तभी लौटेंगे जब सरकार उनकी दस सूत्रीय मांगें मान ले और उसका आदेश जारी करे। इस प्रकार से अब सरकार और कर्मचारी संघ आमने-सामने हो चुके हैं, इस हड़ताल का असर बीमारों और मरीजों के इलाज पर व्यापक पड़ा है। अब देखने की बात होगी कि सरकार क्या निर्णय लेती है, क्योंकि केंद्र और राज्य की सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लग चुका है। मोदी की गारंटी को कर्मचारी झूठी बता चुके हैं, कर्मचारियों और जनता से छल करने वाला बता चुके हैं।
सरकार की चेतावनी – एक महीने के भीतर लौटो, वरना बर्खास्तगी
बता दें कि सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए हड़ताल पर गए एन एच एम कर्मियों को एक महीने के भीतर कार्य पर लौटने का अल्टीमेटम दिया है। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की ओर से बर्खास्तगी की चेतावनी देते हुए नोटिस जारी किए गए हैं। लेकिन इस चेतावनी का जवाब देते हुए कर्मचारियों ने साफ कहा है, हम तो पहले ही सामूहिक इस्तीफा दे चुके हैं। अब डराने-धमकाने से कुछ नहीं होगा। हमारी मांगें मान ली जाए, सरकार गीदड़ भभकी हमें न दिखाए। कर्मचारियों का आरोप है कि प्रदेश की सत्ता में लौटने के लिए जब भारतीय जनता पार्टी ने मोदी की गारंटी के अंतर्गत संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों के नियमितीकरण को शामिल किया था इसके तहत सरकार बनने के बाद कर्मचारियों का नियमितीकरण कर देने का वादा किया गया था। लेकिन सरकार बनने के 20 माह बाद भी अब तक इस घोषणा पर कोई काम नहीं किया गया है।
कर्मचारियों का आरोप – सरकार साजिश रच रही है
संविदा स्वास्थ्य कर्मियों का आरोप है कि यह नोटिस सरकार की रणनीतिक चाल है, जिससे वह हड़ताल को कमजोर करना चाहती है। कर्मचारियों ने दो टूक कहा –अब आर-पार की लड़ाई शुरू हो चुकी है। जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, हम पीछे हटने वाले नहीं हैं।
जानिए यह हैं 10 सूत्रीय मांगे
कर्मचारियों की मुख्य मांगें हैं:
1. स्थायीकरण और संवलियान
2. पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना
3. ग्रेड पे का निर्धारण
4. कार्य मूल्यांकन व्यवस्था में पारदर्शिता
5. लंबित 27% वेतन वृद्धि
6. नियमित भर्ती में सीटों का आरक्षण।
7. अनुकंपा नियुक्ति
8. मेडिकल एवं अन्य अवकाश की सुविधा
9. स्थानांतरण नीति
10. न्यूनतम 10 लाख कैशलेस चिकित्सा बीमा।
इलाज नहीं मिलने से हुई महिलाओं की मौत
बलौदा बाजार जिले से सामने आई जानकारी में प्रदेश की स्थिति का अंदाजा और हड़ताल से फैली स्वास्थ्य सेवा में अव्यवस्था की स्थिति की भयावहता को बयां करती हैं। अब तक बलौदा बाजार में दो महिलाओं की मौत हो चुकी है, इनमें एक महिला डेलिवरी के लिए भटकते हुए जिला अस्पताल पहुंची थी, जहां से रेफर कर दिया गया था, जबकि दूसरी महिला बच्चा होने के बाद तबीयत बिगड़ने पर रेफर होकर जिला अस्पताल भेजी गई थी जहां से उसे रेफर कर दिया गया है। दोनों मामले में इलाज के अभाव में महिलाओं की मौत होने का आरोप लगा है। इतना ही नहीं जिला अस्पताल में केस बिगड़ने पर हर तरह के मरीजों को रेफर किया जा रहा है। इसमें एक्सीडेंट से लेकर सामान्य सर्दी बुखार तक के मरीज शामिल हैं। आरोप लग रहा है कि जिला अस्पतालों में भी कर्मचारियों की बड़ी कमी होने से बेहतर इलाज नहीं मिल पा रही है। लगातार बिगड़ती व्यवस्था को लेकर जनता में भी गुस्सा फूट पड़ा है। परिजनों के हताहत होने के लिए परिजन सरकार को दोषी मान रहे हैं।
जनता बोली – सरकार क्यों भूल गई ‘मोदी की गारंटी’?
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि जब भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव के दौरान संविदा स्वास्थ्य कर्मियों से नियमितीकरण का वादा किया था, तो अब उसे पूरा क्यों नहीं किया जा रहा है? घोषणा-पत्र में जो वादा किया गया था, मोदी की गारंटी में जो बातें कही गई थीं, अब उन्हें पूरा क्यों नहीं किया जा रहा? ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं प्रभावित हुई हैं। इलाज की बेहतर व्यवस्था नहीं मिल पा रही है, ना सरकार वादा खिलाफी करती और ना ही कर्मचारी हड़ताल पर जाते और जब कर्मचारी हड़ताल पर नहीं जाते तो उन्हें मिलने वाली सभी सुविधाएं उन्हें मिलती रहती। यह सरकार की लापरवाही है कि उन्होंने वादे पूरे नहीं किए और कर्मचारियों को हड़ताल पर जाना पड़ा जिसका खामियाजा अब लोगों को बीमारी के समय भुगतना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अफसरों पर भी उठे सवाल
हड़ताली कर्मचारियों ने स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों खासकर सचिव, आयुक्त पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं कि वे सरकार तक उनकी बात नहीं पहुंचा रहे। गलत जानकारी पहुंचा रहे हैं और हड़ताल की गंभीरता को हल्के में ले रहे हैं। जिसका खामियाजा अब आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
सरकार के पास अब दो ही विकल्प – संवाद या संकट
प्रदेश की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। संविदा कर्मियों ने साफ कहा है- इतने नोटिस भेजने से अच्छा है कि सरकार एक पत्र में हमारी मांगें मान ले, हड़ताल उसी दिन समाप्त हो जाएगी। अब सरकार के पास दो ही विकल्प है इस संकट की स्थिति पर कर्मचारियों से बात करे, क्योंकि अब तक की बातचीत असफल रही है। साथ ही जगह जगह स्वास्थ्य मंत्री के बयान को झूठा बताया जा रहा है उससे स्थिति बदलती जा रही है, हड़ताल का व्यापक असर है, अगर सरकार यही स्थिति बनाए रखती है तो आने वाले समय में जनता मैदान में उतर सकती है, तब स्थिति नियंत्रण करना सरकार के बस की बात नहीं होगी। माना जा रहा है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो आने वाले दिनों में स्वास्थ्य संकट और भी गहरा सकते हैं।
इच्छा मृत्यु की मांग: 16 हजार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी राज्यपाल को सौंपेंगे सामूहिक आवेदन

छत्तीसगढ़ में अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल पर बैठे 16 हजार एनएचएम संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अब राज्यपाल के नाम सामूहिक रूप से इच्छा मृत्यु की मांग करते हुए हस्ताक्षर किए हैं। ये सभी कर्मचारी जल्द ही यह आवेदन महामहिम राज्यपाल को सौंपेंगे। कर्मचारियों का कहना है कि वे कोरोना काल के योद्धा हैं, जिन्होंने महामारी के समय जान जोखिम में डालकर सेवाएं दीं, लेकिन सरकार अब उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। लगातार 160 बार आवेदन देने के बाद भी जब सरकार ने कोई सुनवाई नहीं की, तो मजबूर होकर हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा। उनका आरोप है कि सरकार उनकी मांगें मानने की बजाय दमनकारी कार्रवाई कर रही है और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही है। हड़ताल के चलते ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं ठप हैं – टीकाकरण, प्रसव, नवजात यूनिट, पोषण पुनर्वास, टीबी इलाज, मानसिक स्वास्थ्य और गैर संचारी रोगों की सेवाएं बंद हैं। इन कर्मचारियों को न तो नियमित वेतन, न स्वास्थ्य बीमा, न स्थानांतरण नीति और न ही जॉब सिक्योरिटी है। उनका कहना है, “अब सिर्फ आश्वासन नहीं, लिखित आदेश चाहिए। जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा।
हमारा सवाल-
क्या सरकार संवाद का रास्ता चुनेगी या टकराव का?
क्या मोदी की गारंटी झूठी है?
क्या संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की मांगें वाजिब हैं या यह आंदोलन राजनीतिक रंग ले चुका है?
आप क्या सोचते हैं? अपनी राय जरूर साझा करें।
Author: Deependra Shukla
मैं पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूँ और वर्तमान में Unfearnews में संपादक (Editor) के रूप में कार्यरत हूँ। पत्रकारिता की बारीकियों को समझने और उसे निष्पक्ष व प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करने का मेरा विशेष अनुभव है। मैंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर से 2012-14 में गोल्ड मेडल के साथ पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। इसके बाद ETV, News18, Dainik Bhaskar, NDTV, AajTak जैसी देश की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थाओं के साथ काम किया है। हमारा विजन: स्वतंत्र, निष्पक्ष और शोध-आधारित पत्रकारिता के माध्यम से समाज को सशक्त बनाना और जनता तक सत्य, निष्पक्ष एवं गहन विश्लेषण के साथ समाचार पहुंचाना। 📩 संपर्क करें: ✉️[deependrashukla501@gmail.com] 🌐 [unfearnews.com] [LinkedIn https://www.linkedin.com/in/deependra-kumar-shukla-12532689?utm_source=share&utm_campaign=share_via&utm_content=profile&utm_medium=android_app] 📞 [9109341789]










