छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में 82,892 मामले लंबित! जजों की कमी बनी बड़ी चुनौती, तीन न्यायाधीशों का कार्यकाल बढ़ाया गया

छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट
“छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में 82,892 मामले लंबित, 22 में से 16 जज कार्यरत। न्याय में देरी से चिंता बढ़ी, तीन न्यायाधीशों का कार्यकाल बढ़ाया गया।”
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में 82,892 मामले लंबित! जजों की कमी बनी बड़ी चुनौती, तीन न्यायाधीशों का कार्यकाल बढ़ाया गया

लीगल रिपोर्टर| बिलासपुर

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में लंबित मामलों की संख्या 82,892 तक पहुंच गई है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया पर भारी दबाव बढ़ता जा है। इनमें से 30,354 मामले पांच साल से अधिक पुराने हैं। मौजूदा समय में हाईकोर्ट में केवल 16 न्यायाधीश कार्यरत हैं, जबकि स्वीकृत न्यायाधीशों की संख्या 22 है। हालांकि 22 जजों की नियुक्ति को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट में पहले ही आवश्यक कोर्ट रूम तैयार कर लिए गए हैं लेकिन पर्याप्त संख्या में जजों की नियुक्ति न होने से मामलों का निपटारा धीमा पड़ रहा है। न्यायिक मामलों के बढ़ते बोझ और लंबित केसों को देखते हुए राष्ट्रपति ने हाल ही में तीन अतिरिक्त न्यायाधीशों के कार्यकाल को एक वर्ष के लिए बढ़ाने की मंजूरी दी है।

बता दें कि जस्टिस सचिन सिंह राजपूत, जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल और जस्टिस संजय कुमार जायसवाल को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक और वर्ष के लिए अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया है। यह नियुक्तियां संविधान के अनुच्छेद 224(1) के तहत की गई हैं। इनके कार्यकाल की अवधि क्रमशः 16 मई 2025, 2 अगस्त 2025 और 1 मई 2025 से प्रभावी होगी।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जजों की कमी और लंबित मामलों का बढ़ता बोझ

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में लंबित मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। न्याय प्रक्रिया की धीमी गति और जजों की कमी के चलते आम नागरिकों को वर्षों तक फैसले का इंतजार करना पड़ता है। आंकड़ों के मुताबिक, हाईकोर्ट में हर महीने औसतन 3,588 नए मामले दर्ज होते हैं, जिससे लंबित मामलों का भार लगातार बढ़ता जा रहा है।

सबसे अधिक लंबित मामले किस प्रकार के हैं?

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में लंबित मामलों का सबसे बड़ा हिस्सा सिविल रिट पिटीशनों (WPS) का है, जो सरकारी कर्मचारियों की सेवा शर्तों, वेतन विसंगतियों, पदोन्नति विवादों और अनुशासनात्मक कार्यवाहियों से जुड़े होते हैं।

इनमें सिविल रिट पिटीशनों (WPS) की संख्या 16306 है, जो दर्शाता है कि सरकारी सेवाओं से जुड़े विवाद न्यायालय में सबसे अधिक लंबित हैं। यह मामले सरकारी कर्मचारियों की सेवा शर्तों वेतन विसंगतियां पदोन्नति विवादों और अनुशासनात्मक कार्यवाहियों से जुड़े होते हैं। इसके बाद सामान्य सिविल मामले (WPC) 10,959, आपराधिक अपील (CRA) 14,157, और मोटर दुर्घटना दावों (MAC) से जुड़े 10,215 मामले लंबित हैं।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट: लंबित मामलों के प्रमुख कारण

1. जजों की संख्या कम: स्वीकृत 22 न्यायाधीशों की तुलना में सिर्फ 16 न्यायाधीश कार्यरत हैं, जिससे मामलों की सुनवाई धीमी हो रही है।

2. नए मामलों की वृद्धि: हाईकोर्ट में हर महीने 3,588 नए मामले दर्ज होते हैं, जिससे पेंडेंसी बढ़ती जा रही है।

3. पुराने मामलों की अधिक संख्या: पाँच वर्षों से अधिक पुराने 30,354 मामले अब तक लंबित हैं।

4. प्रक्रियागत देरी: गवाहों की अनुपलब्धता, दस्तावेजों की कमी और अपील प्रक्रिया में लगने वाला समय भी मामलों के निपटारे में देरी का कारण है।

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उठाए गए कदम और सुधार की जरूर

राष्ट्रपति द्वारा तीन अतिरिक्त न्यायाधीशों के कार्यकाल को एक वर्ष के लिए बढ़ाने का फैसला हाईकोर्ट पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक अस्थायी समाधान है और नई न्यायिक नियुक्तियों के बिना मामलों का बैकलॉग खत्म नहीं होगा।

छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट अधिवक्ताओं का यह कहना है 

हाइकोर्ट के अधिवक्ता कहते हैं, “छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जजों की संख्या यदि जल्द नहीं बढ़ाई गई तो लंबित मामलों की संख्या 1 लाख के पार जा सकती है। सरकार को तत्काल नई नियुक्तियां करनी होंगी। साथ ही मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष बेंच बनाई जानी चाहिए।”

कोर्टरूम की सुविधा उपलब्ध, लेकिन जजों की नियुक्ति आवश्यक

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में पहले से 22 जजों की नियुक्ति को ध्यान में रखते हुए कोर्टरूम का निर्माण किया जा चुका है। यानी भौतिक ढांचे की कोई कमी नहीं है, लेकिन कार्यरत जजों की संख्या कम होने के कारण मामलों का निपटारा प्रभावित हो रहा है। यदि सरकार जल्द ही 6 नए न्यायाधीशों की नियुक्ति कर देती है, तो लंबित मामलों की संख्या में तेजी से कमी लाई जा सकती है।

क्या हो सकता है समाधान?

1. जल्द से जल्द नई न्यायाधीशों की नियुक्ति की जाए।

2. मध्यस्थता (Mediation) और त्वरित निपटारे (Fast Track Courts) को बढ़ावा दिया जाए।

3. डिजिटल सुनवाई (E-Courts) को और प्रभावी बनाया जाए ताकि दूरदराज के मामलों की तेजी से सुनवाई हो सके।

4. सामूहिक याचिकाओं (Class Action Suits) और बेंच-बार समन्वय को बेहतर किया जाए ताकि मामलों का तेजी से निपटारा हो।

 

नई नियुक्तियों से ही मिलेगी लंबित मामलों से निजात

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की कमी और लंबित मामलों की बढ़ती संख्या राज्य की न्यायिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। तीन अतिरिक्त न्यायाधीशों के कार्यकाल बढ़ाने से कुछ राहत जरूर मिलेगी, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। अगर समय पर नई नियुक्तियाँ नहीं हुईं और त्वरित निपटारे के उपाय नहीं अपनाए गए, तो आने वाले समय में मामलों की संख्या और बढ़ सकती है। सरकार को इस दिशा में तत्काल कदम उठाने होंगे ताकि आम जनता को समय पर न्याय मिल सके और हाईकोर्ट पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सके।

आप अपना सुझाव कमेंट करें, किस तरह से न्याय व्यवस्था को और मजबूत कर सकते हैं? किस तरह से लंबित मामलों की संख्या कम की जा सकती है?

Deependra Shukla
Author: Deependra Shukla

मैं पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूँ और वर्तमान में Unfearnews में संपादक (Editor) के रूप में कार्यरत हूँ। पत्रकारिता की बारीकियों को समझने और उसे निष्पक्ष व प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करने का मेरा विशेष अनुभव है। मैंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर से 2012-14 में गोल्ड मेडल के साथ पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। इसके बाद ETV, News18, Dainik Bhaskar, NDTV, AajTak जैसी देश की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थाओं के साथ काम किया है। हमारा विजन: स्वतंत्र, निष्पक्ष और शोध-आधारित पत्रकारिता के माध्यम से समाज को सशक्त बनाना और जनता तक सत्य, निष्पक्ष एवं गहन विश्लेषण के साथ समाचार पहुंचाना। 📩 संपर्क करें: ✉️[deependrashukla501@gmail.com] 🌐 [unfearnews.com] [LinkedIn https://www.linkedin.com/in/deependra-kumar-shukla-12532689?utm_source=share&utm_campaign=share_via&utm_content=profile&utm_medium=android_app] 📞 [9109341789]

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