इंजन बढ़ते गए, बोगियां छूटती गईं – इंजन वाली सरकार पर बड़ा सवाल!

इंजन वाली सरकार
“इंजन बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन बोगियां पीछे छूट रही हैं। क्या सत्ता का विस्तार ही विकास है? जानें इंजन वाली सरकार की सच्चाई पढ़िए इस राजनीतिक विश्लेषण में।”

इंजन बढ़ते गए, बोगियां छूटती गईं – इंजन वाली सरकार पर बड़ा सवाल!

इंजन वाली सरकार
डबल इंजन सरकार! इंजन बढ़ते गए बोगियां छूटती गईं।

 

देश की राजनीति में एक नई परिभाषा गढ़ी गई—”डबल इंजन सरकार”। कहा गया कि जब केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार होगी, तो विकास की गति तेज हो जाएगी। लोग इस तर्क से सहमत हुए, और फिर नतीजे आने लगे। पहले विधानसभा, फिर लोकसभा, उसके बाद नगर पंचायत, नगर पालिका, नगर निगम, फिर जनपद पंचायत, जिला पंचायत हर जगह एक ही पार्टी के झंडे लहराने लगे।

अब मामला डबल इंजन से आगे बढ़ गया है। हर बार चुनाव के बाद एक और इंजन जुड़ जाता है। अब तो गांव से लेकर शहर तक विकास की लहर का दावा किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि ट्रेन और तेज दौड़ेगी। एक इंजन बढ़ गया, फिर एक और इंजन जुड़ गया। देखते ही देखते इंजन बढ़ते गए, लेकिन सवाल उठने लगे—ट्रेन में बोगियां कहां गईं?

डबल इंजन सरकार की परिभाषा अब बदल चुकी है। पहले कहा जाता था कि अगर केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार होगी, तो विकास की रफ्तार दोगुनी हो जाएगी। जनता को यही बताया गया कि डबल इंजन की ताकत से हर क्षेत्र में तेज़ी आएगी। लेकिन अब मामला डबल इंजन से आगे बढ़कर मल्टी इंजन तक पहुंच गया है। पंचायत से लेकर संसद तक, हर जगह सत्ता का एकतरफा राज कायम हो चुका है।

अब दावा किया जा रहा है कि एक और इंजन जुड़ गया, विकास की गाड़ी और तेज़ हो गई। लेकिन सवाल उठता है कि अगर इंजन ही इंजन जोड़ते जाएंगे, तो बोगियां कहां जाएंगी? क्या ट्रेन में यात्रियों के लिए कोई जगह बचेगी या सिर्फ इंजन दौड़ते रहेंगे?

ट्रेन में बोगियां बची भी हैं या नहीं?

राजनीति में सत्ता पाना महत्वपूर्ण होता है, लेकिन सत्ता में रहकर जनता को साथ लेकर चलना उससे भी ज्यादा अहम होता है। जब सरकारों की संख्या बढ़ती गई, जब हर पंचायत, हर शहर, हर जिला एक ही पार्टी के रंग में रंग गया, तब लोगों को उम्मीद थी कि विकास की गाड़ी सरपट दौड़ेगी।

लेकिन जब इंजन ही इंजन नजर आने लगे और बोगियां पीछे छूटती दिखीं, तब एहसास हुआ कि कहीं कुछ गड़बड़ है। ट्रेन लंबी होती गई, मगर उसमें बैठने वालों की जगह कम होती गई। इंजन दौड़ते रहे, लेकिन यात्रियों को मंज़िल पर पहुंचाने का काम कौन करेगा?

इंजन बढ़ाने की मची होड़

हर चुनाव के बाद कहा जाता है कि विकास की स्पीड बढ़ गई। लेकिन विकास दिखता कहां है? अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं, स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, सड़कों पर गड्ढे हैं, किसानों को अपनी फसल का दाम नहीं मिल रहा, नौजवानों के हाथों में डिग्रियां हैं लेकिन नौकरी नहीं है।

फिर भी हर चुनाव के बाद एक ही नारा गूंजता है—”डबल इंजन, ट्रिपल इंजन, मल्टी इंजन सरकार!” क्या सरकारें सिर्फ सत्ता के विस्तार के लिए बनाई जाती हैं? क्या राजनीति का मकसद केवल चुनाव जीतना रह गया है? अगर हर पंचायत से लेकर संसद तक एक ही पार्टी की सरकार है, तो फिर विकास में कोई रुकावट क्यों होनी चाहिए? या फिर हर तरफ सिर्फ इंजन बढ़ाने की होड़ लगी हुई है?

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जहां सब अपने, वहां भी दुश्मन कौन?

जब कोई दूसरा विचार सत्ता में नहीं बचा, जब कोई विपक्ष खड़ा नहीं रहा, जब हर निर्णय बिना किसी चुनौती के लिया जाने लगा, तब सवाल उठने लगे कि फिर विकास में बाधा कहां से आ रही है?

पिछली सरकारों पर आरोप लगाना अब आसान नहीं रहा, क्योंकि अब कोई दूसरी सरकार ही नहीं बची। हर जगह वही हैं, जो पहले कहते थे कि उन्हें काम नहीं करने दिया जाता। अब जब पूरा इंजन उनके हाथ में है, तो सवाल यह है कि सफर में रुकावट कहां आ रही है? क्योंकि विपक्ष के ऊपर जिस तरह से कार्रवाई चल रही है, जिस तरह से मीडिया की आवाज दबाई गई है, अब न तो कोई जनता का मुद्दा उठाने वाला बचा है और न ही कोई सवाल उठाने वाला।

जनता सिर्फ तमाशबीन बनी रहेगी

लोकतंत्र में जनता सबसे बड़ी ताकत होती है। लेकिन अगर जनता सिर्फ तालियां बजाने और चुनावी जश्न मनाने तक सीमित रह जाए, तो फिर लोकतंत्र का असली उद्देश्य खत्म हो जाता है। अब सिर्फ जनता मतदान करने के बाद जश्न मनाने तक सीमित रह गई है। एक तरह से सिर्फ सत्ता का तमाशबीन बन कर रह गई है। जबकि जनता को चाहिए कि वह सरकार से सवाल पूछे—

– अगर हर जगह हमारी सरकार है, तो विकास अब तक अधूरा क्यों है?

– अगर इंजन ही इंजन जोड़ते जा रहे हैं, तो यात्री कब तक स्टेशन पर खड़े रहेंगे?

– जब पूरा सिस्टम एक ही पार्टी के नियंत्रण में है, तो फिर समस्याएं क्यों जस की तस बनी हुई हैं?

– इंजन इतना बढ़ गया है तो फिर विकास का रफ्तार बढ़ क्यों नहीं रहा है?

– कुछ आगे- कुछ पीछे कहीं इंजन गलत दिशा में तो नहीं जोड़ा जा रहा?

ट्रेन की दिशा तय कौन करेगा?

इंजन बढ़ाने से ट्रेन की गति तेज हो सकती है, लेकिन अगर दिशा ही गलत हो, तो दुर्घटना तय है। जिस दिन जनता ने सवाल करने शुरू कर दिए, उस दिन यह तय होगा कि ट्रेन सही दिशा में जा रही है या नहीं। क्योंकि सरकार तो मानकर चल रही है कि विकास की ट्रेन सही दिशा में चल रही है।

इंजन बढ़ते रहें, लेकिन यह मत भूलिए कि ट्रेन को चलाने के लिए यात्रियों की जरूरत होती है। सत्ता का संतुलन जरूरी है। अगर हर जगह एक ही आवाज गूंजेगी, तो लोकतंत्र की खूबसूरती खत्म हो जाएगी। सत्ता का असली उद्देश्य जनता की सेवा होना चाहिए, न कि सत्ता का विस्तार।

क्या वास्तव में स्पीड बढ़ी है?

सरकार कहती है कि विकास की गति तेज हो चुकी है, लेकिन ज़मीन पर हकीकत कुछ और ही नजर आती है। अगर सच में स्पीड बढ़ी होती, तो –
✔ अस्पतालों में डॉक्टरों की संख्या बढ़ती
✔ युवाओं को रोज़गार के बेहतर अवसर मिलते ✔ किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिलता
✔ सड़कों की हालत सुधरती
✔ महंगाई और बेरोजगारी कम होती

लेकिन इन तमाम सवालों के जवाब देने के बजाय हर चुनाव के बाद बस यही सुनने को मिलता है कि “अब तो ट्रिपल इंजन हो गया”, “अब मल्टी इंजन सरकार बन गई”।

जहां कोई रुकावट नहीं, वहां विकास क्यों नहीं?

जब विपक्ष सत्ता में था, तब सरकार कहती थी कि हमें काम नहीं करने दिया जा रहा। हर फैसले में रुकावट डाली जाती है। लेकिन अब जब जनपद पंचायत, जिला पंचायत, नगर पंचायत, नगर पालिका, नगर निगम, विधानसभा और लोकसभा – सब जगह एक ही सरकार है, तो फिर काम में देरी क्यों?

✔ अब कोई विरोध नहीं ✔ कोई सत्ता संघर्ष नहीं ✔ कोई नीतिगत अड़चन नहीं

तो फिर हर समस्या जस की तस क्यों बनी हुई है? सवाल उठता है कि इंजन तो बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन आखिर यह गाड़ी चल क्यों नहीं रही?

क्या सत्ता का संतुलन खत्म हो रहा है?

लोकतंत्र में सत्ता और विपक्ष दोनों का बराबर महत्व होता है। अगर सत्ता बेलगाम हो जाए और विपक्ष खत्म हो जाए, तो लोकतंत्र का संतुलन बिगड़ जाता है। यही काम वर्तमान में किया जा रहा है। सत्ता में काबिज होने के जुनून में विपक्ष को खत्म करने की साजिश रची जा रही है। आज जब हर जगह एक ही पार्टी की सरकार है, तो सवाल यह है कि –

✔ जनता की आवाज़ उठाने वाला कौन है? ✔ फैसलों पर सवाल करने वाला कौन है? ✔ नीतियों की समीक्षा कौन करेगा?

अगर हर जगह सत्ता का ही दबदबा रहेगा और विपक्ष सिर्फ नाम मात्र का रह जाएगा, तो फिर जनता की समस्याओं को उठाने वाला कौन होगा?

ट्रेन सही दिशा में है या नहीं?

इंजन बढ़ाने से ट्रेन की गति तेज हो सकती है, लेकिन अगर दिशा ही गलत हो, तो दुर्घटना निश्चित है। सत्ता का विस्तार जरूरी नहीं कि हमेशा विकास लेकर आए। अगर हर जगह एक ही सोच होगी, एक ही विचारधारा होगी, तो विविधता खत्म हो जाएगी, और लोकतंत्र एकतरफा होता जाएगा।

सरकारें आनी-जानी होती हैं, लेकिन सत्ता का संतुलन बना रहना चाहिए। अगर हर चुनाव के बाद सिर्फ इंजन जोड़ने की होड़ मचती रही, तो एक दिन ऐसा आएगा जब यात्रियों के लिए कोई बोगी नहीं बचेगी।

अब जनता को फैसला करना होगा

लोकतंत्र में जनता सबसे बड़ी ताकत होती है। अगर जनता सिर्फ तालियां बजाने और चुनावी जश्न मनाने तक सीमित रह गई, तो लोकतंत्र का असली उद्देश्य खत्म हो जाएगा। अब जनता को तय करना होगा कि –
✔ क्या सिर्फ इंजन बढ़ाने से विकास होगा?
✔ क्या विपक्ष की गैरमौजूदगी से लोकतंत्र मजबूत होगा?
✔ क्या हर चुनाव सत्ता के विस्तार का ही खेल बना रहेगा?

जब तक जनता सवाल नहीं करेगी, तब तक इंजन बढ़ते रहेंगे और बोगियां छूटती रहेंगी। अब फैसला जनता को करना है कि उसे सिर्फ दौड़ती हुई ट्रेन देखनी है या उसमें सफर भी करना है।

इंजन बढ़ाने से नहीं, बोगियां जोड़ने से चलेगी ट्रेन

अंतिम में यही कहूंगा कि अगर सच में विकास चाहिए, तो इंजन बढ़ाने की नहीं, बोगियां जोड़ने की जरूरत है। जनता को साथ लेकर चलने की जरूरत है। वरना, कहीं ऐसा न हो कि ट्रेन तो पूरी रफ्तार से दौड़ रही हो, लेकिन उसमें बैठने के लिए कोई न बचा हो। अब फैसला जनता को करना है कि वह केवल इंजन गिनने में व्यस्त रहेगी या यह देखेगी कि ट्रेन सही रास्ते पर है या नहीं।

क्या आप मानते हैं कि इंजन बढ़ने से विकास होता है या जनता की भागीदारी ज़रूरी है? अपने विचार कमेंट में साझा करें!”

Deependra Shukla
Author: Deependra Shukla

मैं पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूँ और वर्तमान में Unfearnews में संपादक (Editor) के रूप में कार्यरत हूँ। पत्रकारिता की बारीकियों को समझने और उसे निष्पक्ष व प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करने का मेरा विशेष अनुभव है। मैंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर से 2012-14 में गोल्ड मेडल के साथ पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। इसके बाद ETV, News18, Dainik Bhaskar, NDTV, AajTak जैसी देश की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थाओं के साथ काम किया है। हमारा विजन: स्वतंत्र, निष्पक्ष और शोध-आधारित पत्रकारिता के माध्यम से समाज को सशक्त बनाना और जनता तक सत्य, निष्पक्ष एवं गहन विश्लेषण के साथ समाचार पहुंचाना। 📩 संपर्क करें: ✉️[deependrashukla501@gmail.com] 🌐 [unfearnews.com] [LinkedIn https://www.linkedin.com/in/deependra-kumar-shukla-12532689?utm_source=share&utm_campaign=share_via&utm_content=profile&utm_medium=android_app] 📞 [9109341789]

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