जिला पंचायत चुनाव: बागियों ने भाजपा को झुकाया, अध्यक्ष-उपाध्यक्ष पद पर किया कब्जा

बलौदा बाजार। जिला पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद का चुनाव भारी गहमागहमी और हंगामे के बीच संपन्न हुआ। भाजपा कार्यकर्ताओं का आरोप इस चुनाव में भाजपा को अपनी ही पार्टी के बागी सदस्यों के आगे घटना टेकना पड़ा। भाजपा कार्यकर्ताओं का यह भी आरोप है कि नवनिर्वाचित अध्यक्ष आकांक्षा गोलू जायसवाल और उपाध्यक्ष पवन साहू ने पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ा और जीत दर्ज करने के बाद भाजपा के समर्थन से शीर्ष पदों पर काबिज हो गए। इस घटनाक्रम से भाजपा कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष देखने को मिला और उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए।
भाजपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए आकांक्षा जायसवाल को अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया, लेकिन यह फैसला पार्टी कार्यकर्ताओं को नागवार गुजरा। वजह यह थी कि जिला पंचायत सदस्य चुनाव के दौरान भाजपा ने क्षेत्र क्रमांक 8 से चंद्रिका दिनेश साहू को अधिकृत प्रत्याशी बनाया था, जबकि आकांक्षा जायसवाल ने बागी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उस समय पार्टी ने उन्हें समझाने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने निर्दलीय रूप से जीत दर्ज की। इसके बावजूद भाजपा ने उन्हें अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बना दिया, जिससे कार्यकर्ताओं में रोष फैल गया। उपाध्यक्ष पद पर भी ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पवन साहू, जिन्होंने अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ा था, ने जीत के बाद उपाध्यक्ष पद पर दावा ठोका और अंततः निर्वाचित हुए। भाजपा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पार्टी ने बागियों के आगे घुटने टेक दी और उन उम्मीदवारों को पद दिलाया, जिन्होंने पार्टी अनुशासन को तोड़ा था।

भाजपा कार्यालय में हंगामा, कार्यकर्ताओं ने लगाए गंभीर आरोप

इस फैसले से नाराज भाजपा कार्यकर्ताओं ने जिला भाजपा कार्यालय में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यालय के बाहर कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए बड़े नेताओं पर पक्षपात का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि भाजपा पर्यवेक्षकों ने गलत तरीके से आकांक्षा जायसवाल का समर्थन किया और उनकी पसंद के प्रत्याशी को आगे बढ़ाने के लिए अनुचित तरीके अपनाए।
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा नेताओं ने अपने सदस्यों को कार्यालय में बुलाकर उन्हें अलग कमरे में बंद कर दिया था ताकि वे किसी बाहरी दबाव में न आ सकें। हंगामे के दौरान नाराज कार्यकर्ताओं ने दरवाजे का ताला तोड़ दिया और सदस्यों को बाहर निकाला। चर्चा यह भी थी कि भाजपा ने कांग्रेस की विजयी प्रत्याशी सुनीता विमल देवांगन को भी अपने कार्यालय में रोके रखा ताकि उपाध्यक्ष पद के चुनाव में समर्थन हासिल किया जा सके। बलौदा बाजार जिला पंचायत चुनाव में भाजपा की अंदरूनी कलह वाली राजनीति खुलकर सामने आ गई है। कार्यकर्ताओं की नाराजगी को देखते हुए यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी नेतृत्व इस असंतोष को कैसे संभालता है और कार्यकर्ताओं का भरोसा दोबारा कैसे जीतता है।

 

कार्यकर्ताओं की नाराजगी पर जिले के वरिष्ठ नेताओं ने दी अपनी प्रतिक्रिया 
भाजपा है अनुशासित पार्टी

      इस पूरे विवाद पर प्रदेश के राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि उन्हें इस हंगामे की कोई जानकारी नहीं है, लेकिन भाजपा एक अनुशासित पार्टी है और पूरे प्रदेश में उसके प्रतिनिधि चुने गए हैं। बता दें कि जिस समय यह हंगामा चल रहा था उस समय मंत्री वर्मा भाजपा कार्यालय में मौजूद थे।

असामाजिक तत्वों ने किया विरोध

     वहीं, भाजपा जिला अध्यक्ष आनंद यादव ने कार्यकर्ताओं के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विरोध करने वाले असामाजिक तत्व और कांग्रेस समर्थित लोग हो सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंचायत चुनाव में कोई भी प्रत्याशी पार्टी के आधिकारिक सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ता, इसलिए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर किसी को भी प्रत्याशी बनाया जा सकता है।

आंतरिक गुटबाजी का भविष्य की राजनीति पर असर

     इस चुनाव में भाजपा के भीतर गुटबाजी खुलकर सामने आई है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने अपने व्यक्तिगत हितों को प्राथमिकता दी और जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की। कुछ नेताओं ने यहां तक आरोप लगाया कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने बाहरी दबाव में काम किया और अपनी साख गिरा दी।

सभी का सहयोग मिला, विवादों पर कुछ नहीं कहूंगी

     दूसरी ओर, नवनिर्वाचित अध्यक्ष आकांक्षा जायसवाल ने अपने समर्थकों का धन्यवाद देते हुए कहा कि वे सभी सदस्यों के सहयोग से जिले के विकास के लिए काम करेंगी। हालांकि, उन्होंने विवादों और हंगामा पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। इधर भाजपा कार्यकर्ताओं के आक्रोश को देखते हुए यह स्पष्ट है कि यह विवाद जल्द खत्म होने वाला नहीं है और इसका असर आने वाले समय में देखने को मिल सकता है।

मीडिया से बचते रहे प्रदेश उपाध्यक्ष शिवरतन शर्मा

भाजपा कार्यालय में विवाद के दौरान सबसे अधिक चर्चा में बीजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष शिवरतन शर्मा रहे। सूत्रों की माने कार्यकर्ताओं ने भाजपा कार्यालय में बंद ताले को तोड़कर उन्हें बाहर निकाला था। हालांकि भाजपा कार्यालय के बाहर मौजूद मीडियाकर्मियों ने कई बार उनसे बात करने का प्रयास किया, लेकिन हर बार वे मीडिया से बचते और भागते रहे। माना जा रहा है कि इस चुनाव में हुई गड़बड़ी के उजागर होने का भय कहीं न कही शीर्ष नेतृत्व को है।

फॉर्च्यूनर, स्कॉर्पियो और 15 लाख की चर्चा तेज

विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं के बीच फॉर्च्यूनर, स्कॉर्पियो और 15-15 लाख रुपए की चर्चा रही। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि किसी बड़े नेता को फॉर्च्यूनर कार गिफ्ट की गई है, जिससे रातों रात भाजपा का अधिकृत प्रत्याशी बदल दिया गया। इतना ही नहीं सभी सदस्यों को 15- 15 लाख रुपए और स्कॉर्पियो कार दिए जाने की भी चर्चा सरेआम हो रही है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यही वजह है कि धन बल के दबाव में आकर शीर्ष नेताओं ने पार्टी को ताख से रखकर बागी प्रत्याशियों को शीर्ष कमान दे दिया।

भाजपा नेताओं को भी बंद रख दिया कार्यालय

 भाजपा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि भाजपा से अध्यक्ष के लिए पहले अधिकृत प्रत्याशियों की सूची में पूर्व जिला अध्यक्ष डॉ सनम जांगड़े की पुत्री इंदु जांगड़े और पूर्व मंडल अध्यक्ष डोमन वर्मा की पत्नी गीता डोमन वर्मा का नाम प्रमुख दावेदार होने की चर्चा में था। लेकिन जब निर्वाचन की तारीख आई तो डॉक्टर सनम जांगड़े और डोमन वर्मा को भी भाजपा कार्यालय में बंद कर दिया गया। वे भी निर्वाचन में भाग नहीं ले पाए। हालांकि जब उनसे अधिकृत जानकारी लेने के लिए दोनों नेताओं से बात करने की कोशिश की गई तो दोनों नेताओं का नंबर बंद आया। वहीं जिला पंचायत के नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष पवन साहू भी भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी नवीन मिश्रा के खिलाफ बगावत कर चुनाव लड़े थे।

उलटफेर से ठगा महसूस कर रहे कार्यकर्ता

इस पूरे चुनाव में हुई उलटफेर के बाद भाजपा के कार्यकर्ता खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। जमीनी स्तर पर कई वर्षों से काम करने और चुनाव में तन मन धन के रूप में लाखों रुपए खर्च कर चुनाव जीते नेताओं के उम्मीदों पर शीर्ष नेताओं ने पानी फेर दिया। यही वजह है कि कार्यकर्ता मायूस हैं और उनमें शीर्ष नेतृत्व से नाराजगी है। चर्चा का विषय है कि भाजपा कार्यालय के प्रथम तल पर जिला पंचायत के निर्वाचित भाजपा के अधिकृत प्रत्याशियों को जब बंद कर रखा गया था तब अध्यक्ष पद के लिए फील्डिंग जमाए अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाले भाजपा के एक वरिष्ठ नेता भी अंदर बंद थे, लेकिन जब उन्हें नामांकन में अवसर नहीं दिया गया तो दुखी होकर सार्वजनिक तौर पर उन्होंने शीर्ष नेतृत्व पर आरोप लगाया। हालांकि कार्यकर्ताओं के शोर के बीच उनका वीडियो नहीं बन पाया, लेकिन उन्होंने जो कहा ” वह जिन नेताओं को आजतक पिता तुल्य मानते थे वह उनके पीठ में छूरा घोंपने का काम किए हैं।” भाजपा कार्यकर्ता पार्टी के इस रुख और नेताओं के व्यवहार से काफी दुखी हैं और उनका मनोबल इस चुनाव में हुई उलटफेर से कहीं न कहीं डगमगा गया है। अब देखने की बात होगी कि भाजपा किस तरह से अपने कार्यकर्ताओं की नाराजगी को दूर करती है।

दोनों पैर को छूकर लिया आशीर्वाद, पूछा नाराज तो नहीं हैं

जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर निर्वाचित होने और सर्टिफिकेट मिलने के बाद भाजपा जिला अध्यक्ष ने सर्टिफिकेट प्राप्त करने वाली अध्यक्ष आकांक्षा गोलू जायसवाल से कहा कि यह पांच साल का प्रमाण पत्र है। वहीं प्रमाण पत्र लेकर बाहर आने पर आकांक्षा जायसवाल मीडिया के सवालों पर बयान देने में लड़खड़ाती नजर आई, उन्हें जिला अध्यक्ष पीछे से बोलने के लिए समझाते नजर आए, वहीं जब उन्होंने पूर्व मंडल अध्यक्ष डोमन वर्मा के सामने आई तो दोनों पैर को छूकर आशीर्वाद ली। इस दौरान आकांक्षा ने डोमन वर्मा से पूछा कि वह नाराज तो नहीं है, उस समय डोमन वर्मा ने नहीं में सिर हिलाया, लेकिन उनके चेहरे का एक्सप्रेशन को देखकर उनके दुख को स्पष्ट रूप से समझा जा सकता था।

भाजपा के कार्यकर्ता या कथित असामाजिक तत्वों ने भाजपा कार्यालय में किया मीडिया से बदसलूकी

भाजपा कार्यालय में चल रहे प्रदर्शन, नारेबाजी को कवरेज करने पहुंचे मीडिया कर्मियों के साथ पूर्व मंडल अध्यक्ष और उनके लोग बदसलूकी करते नजर आए। वीडियो फुटेज तैयार कर रहे उनके कैमरा पर्सन से कई बार धक्का मुक्की करते रहे। यहां तक कि अंत में मीडिया कर्मियों को कवरेज से रोककर कार्यालय से यह कहते हुए बाहर निकाल दिया गया, कि यह भाजपा का घरेलू मामला है। हालांकि इन सभी कार्यकर्ताओं को भाजपा जिला अध्यक्ष आनंद यादव ने असामाजिक तत्व बताया। जिला अध्यक्ष के बयान ने सभी को  चौका दिया कि भाजपा कार्यालय में भाजपा और भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी के लिए जो लड़ने आए थे वे असामाजिक तत्व थे भाजपा के असली कार्यकर्ता नहीं थे। इस दौरान अध्यक्ष ने एक और सवाल का गोल मोल जवाब दिया जो उनसे पूछा गया कि प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि प्रस्तावक के रूप में आई महिला नेत्री को फॉर्च्यूनर कार दिया गया है। इस दौरान यह भी एक विषय चर्चा का रहा कि उस घर की स्थिति और अनुशासन का क्या ही कहना जिस घर के मुखिया फॉर्च्यूनर और जिस घर के सदस्य 15-15 लाख रुपए और स्कॉर्पियो में अपने ईमान को बेच रहे हैं और उनके कार्यकर्ताओं को अपने ही मुखिया के खिलाफ नारेबाजी और प्रदर्शन करना पड़ रहा हो, और जिला अध्यक्ष उन्हें असामाजिक तत्व बता रहे हो। बहरहाल कार्यकर्ताओं ने स्थानीय सभी शीर्ष नेताओं के ऊपर गम्भीर आरोप लगाकर भाजपा को कहीं न कही बैकफुट पर ला दिया है।

Deependra Shukla
Author: Deependra Shukla

मैं पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूँ और वर्तमान में Unfearnews में संपादक (Editor) के रूप में कार्यरत हूँ। पत्रकारिता की बारीकियों को समझने और उसे निष्पक्ष व प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करने का मेरा विशेष अनुभव है। मैंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर से 2012-14 में गोल्ड मेडल के साथ पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। इसके बाद ETV, News18, Dainik Bhaskar, NDTV, AajTak जैसी देश की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थाओं के साथ काम किया है। हमारा विजन: स्वतंत्र, निष्पक्ष और शोध-आधारित पत्रकारिता के माध्यम से समाज को सशक्त बनाना और जनता तक सत्य, निष्पक्ष एवं गहन विश्लेषण के साथ समाचार पहुंचाना। 📩 संपर्क करें: ✉️[deependrashukla501@gmail.com] 🌐 [unfearnews.com] [LinkedIn https://www.linkedin.com/in/deependra-kumar-shukla-12532689?utm_source=share&utm_campaign=share_via&utm_content=profile&utm_medium=android_app] 📞 [9109341789]

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