
सलोनी पंचायत में भ्रष्टाचार: जनपद पंचायत की जांच में सरपंच-सचिव की मिली गड़बड़ी फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
प्रशासनिक रिपोर्टर|बलौदा बाजार
बलौदा बाजार जिले के पलारी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सलोनी में विकास कार्यों को लेकर बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है। यहां ग्रामीणों ने सरपंच बंसीलाल बंजारे और पंचायत सचिव राजेश टंडन पर विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये के गबन का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में जिन कार्यों को पूरा बताया गया है, उनमें भारी अनियमितताएं हैं। कई कार्य अधूरे हैं, तो कई जगहों पर काम हुआ ही नहीं, फिर भी राशि निकाल ली गई। ग्रामीणों ने मौके पर जाकर ऐसे कई कार्यों की स्थिति दिखाई, जहां स्पष्ट रूप से गड़बड़ी नजर आ रही है। इधर जनपद पंचायत ने गड़बड़ी की शिकायत पर जांच कर अब 5.31 लाख रुपए की वसूली के लिए आदेश जारी किया है।

बलौदा बाजार जिले के ग्राम सलोनी के शिकायतकर्ता जितेंद्र डहरिया ने बताया कि गांव में निर्माण के नाम पर सरपंच सचिव ने भ्रष्टाचार किया है। इसकी शिकायत की गई है, जिसपर जांच में गड़बड़ी पाई गई और वसूली के आदेश जारी किए गए, लेकिन अब तक कोई निश्चित कार्रवाई नहीं हो पाई है। उन्होंने गांव में नालियों की सफाई के नाम 1 लाख रुपए निकालने, एक पुलिया के नाम पर 49 हजार निकाला गया लेकिन मात्र 6 इंच की पाइप डाली गई, वहीं दूसरी जगह पहले से बनी पुलिया के नाम पर पैसा निकाल लिया गया। इसी तरह शिकायतकर्ता पुनाराम गायकवाड़ ने कहा कि निर्माण किए बिना ही राशि निकाल ली गई, शिकायत के बाद जांच हुई लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। गरीबा गिलहरे ने बताया की गांव में बारिश के दौरान जो थोड़ी बहुत सफाई किए वह 1 लाख खर्च करने जैसा नहीं था, गड़बड़ी हुई है। इसी तरह से शत्रुघ्न रात्रे ने कहा स्कूल के सामने पंचायत द्वारा कराए गए काम को दिखाए और बताए कि किस तरह से सरपंच सचिव ने गड़बड़ी की है, उन्होंने कहा महज 6 इंच की पाइप डालकर हजारों रुपए का बिल निकाल लिया गया, कार्रवाई होनी चाहिए।
गांव के कई पुराने कामों को नया निर्माण बताकर निकाली गई राशि

गांव में इसके अलावा कई पुराने निर्माण कार्यों को नया बताकर भुगतान निकालने का आरोप भी लगाया गया है। शिकायत के बाद जनपद पंचायत पलारी ने मामले की जांच की तो गड़बड़ी सामने आई। सरपंच और सचिव यहां भ्रष्टाचार किए हैं यह जनपद पंचायत से आई जांच कमेटी की जांच में स्पष्ट हो गया, इसके बाद 5.31 हजार रुपए के वसूली का आदेश निकाला गया, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है और वे प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। साथ ही सरपंच बंसीलाल बंजारे और सचिव राजेश टंडन को बर्खास्त कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग कर रहे हैं।
गांव में नशे के खिलाफ मुहिम चलाया इसलिए ग्रामीणों ने की शिकायत

इधर जब सरपंच बंसीलाल बंजारे से बात की गई तो उन्होंने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने गांव में नशे के खिलाफ अभियान चलाया है, जिससे गांव के ज्यादातर लोग नाराज हैं और इसी वजह से उनके खिलाफ साजिश के तहत आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत सचिव राजेश टंडन पंचायत के विकासकार्य में सहयोग नहीं कर रहा है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
पंचायत से हटाने के लिए दिया है आवेदन
भ्रष्टाचार के आरोप में फंसे पंचायत सचिव राजेश टंडन से जब बात करने पहुंचे तो उन्होंने कहा कि “आपको जो लिखना है लिखिए” और जो दिखाना है दिखाइए, मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता। मामले की जांच चल रही है। साथ ही यह भी बताया कि वह खुद को उस (सलोनी) पंचायत से हटाने के लिए आवेदन दे दिए है।
अग्रिम कार्रवाई जारी, वसूली का आदेश दिया है

बहरहाल इस पूरे मामले में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जांच में अनियमितता सामने आने के बाद भी सरपंच और सचिव के खिलाफ जनपद पंचायत पलारी से कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। जब इसपर जनपद सीईओ पीएल धुर्वे से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा अग्रिम कार्रवाई जारी है। वसूली का आदेश निकल चुका है।
एक साल पहले हुए निर्वाचित हुए हैं सरपंच
बता दें कि पंचायत में नए जनप्रतिनिधि खासकर सरपंच 1 साल पहले हुए चुनाव में ही निर्वाचित हैं। 1 साल के भीतर इतने बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा होना पंचायत के प्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा करता है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि सरपंच चिकित्सा के क्षेत्र में काम कर रहे थे पहले वह डॉक्टर थे और मरीजों का इलाज करते थे, बाद में गांव आए और चुनाव जीतकर सरपंच बने और अब उनके द्वारा बड़ा घोटाला किया गया है। ग्रामीणों ने कहा कि सवाल अब यह ही है कि किस तरीके से डॉक्टर से सरपंच बने बंसीलाल बंजारे ने पंचायत का इलाज के नाम पर भ्रष्टाचार किए जा रहे हैं। यह तो उस प्राइवेट अस्पताल जैसा हो गया है जहां इलाज के नाम पर वसूली होती रहती है परिजन इलाज के नाम पर मची लूट से गरीब होता रहता है। यही हाल सरपंच और सचिव गांव में कर रहे हैं। उनके चंगुल से गांव को कैसे मुक्त किया जाए यही सब ग्रामीण सोच रहे हैं। अब तक उन्होंने लाखों रुपए की गड़बड़ी जो कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अब यह महज संयोग है कि कहावत को पढ़कर ऐसे व्यक्ति को जनप्रतिनिधि बनाया गया था जो पढ़ा लिखा था ताकि यह जनप्रतिनिधि विकास कार्यों में भूमिका निभाएगा, लेकिन यहां तो पढ़ा लिखा जन प्रतिनिधि भ्रष्टाचार करने में भूमिका निभा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह महज एक संयोग है या सोची समझी रणनीति कि किस तरीके से ग्राम विकास के लिए आई राशि का बंदरबाट किया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है। क्या सरपंच के खिलाफ पंचायत अधिनियम की धाराओं के तहत कार्यवाही करते हुए उन्हें पद से मुक्त किया जाता है, क्या सचिव के खिलाफ कोई निश्चित कार्यवाही हो पाती है या ढाक के तीन पात की तरह यह भी मामला सिर्फ जांच और कागजों तक सीमित रह जाएगा।
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सीईओ जनपद पंचायत पलारी की भूमिका की कलेक्टर से हुई शिकायत
बहरहाल ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पलारी जनपद के सीईओ की भी इस गड़बड़ी में भूमिका है, क्योंकि गांव में 15 लाख से अधिक का सरपंच और सचिव ने भ्रष्टाचार किया है, लेकिन अब तक उनके खिलाफ वसूली, पद से हटाने और थाने में मुकदमा दर्ज करने के लिए उनके द्वारा स्पष्ट पहल नहीं की गई है, जांच में गड़बड़ी मिली जरूर लेकिन वसूली आदेश महज 5.31 लाख रुपए की निकाली गई है। इस मामले में संलिप्तता पर सीईओ जनपद पंचायत पलारी की जांच के लिए कलेक्टर के पास ग्रामीणों ने शिकायत कर दी है।
Author: UnfearNews
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