ध्यान दें: यहां बिना अनुमति किया शोर तो प्रशासन बजा देगा बाजा

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ध्यान दें: यहां बिना अनुमति किया शोर तो प्रशासन बजा देगा बाजा

प्रशासनिक रिपोर्टर| बलौदा बाजार

यहां बिना अनुमति किया शोर तो प्रशासन बजा देगा बाजा”—अब यह कोई मजाकिया जुमला नहीं बल्कि बलौदा बाजार जिला प्रशासन का सीधा और सख्त संदेश है। परीक्षाओं के बीच अगर कहीं लाउडस्पीकर गूंजा, डीजे दहाड़ा या नियमों की अनदेखी हुई, तो कार्रवाई तय है। कलेक्टर दीपक सोनी के आदेश के बाद प्रशासन पूरी ताकत में उतर आया है और शांति भंग करने वालों को चेतावनी दे दी गई है कि इस बार बहाने नहीं, सिर्फ कानून चलेगा।

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कलेक्टर दीपक सोनी द्वारा जारी आदेश।

बलौदा बाजार जिले में बोर्ड एवं अन्य शैक्षणिक परीक्षाओं के शांतिपूर्ण संचालन को सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी दीपक सोनी ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। जिले की पूरी सीमा में बिना लिखित अनुमति ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर रोक लगा दी गई है। आदेश के तहत नियम तोड़ने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिससे परीक्षा केंद्रों के आसपास शोर-शराबे पर लगाम लग सके।

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विद्यालयों और महाविद्यालयों में चल रही परीक्षाओं के दौरान बढ़ते ध्वनि प्रदूषण की शिकायतों और छात्रों की पढ़ाई में आ रही बाधाओं को देखते हुए कलेक्टर दीपक सोनी ने छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 की धारा 4 के तहत आदेश जारी किया है। यह आदेश जिले की समस्त शहरी और ग्रामीण सीमाओं पर लागू रहेगा।

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प्रशासन का कहना है कि पिछले कुछ समय से परीक्षा केंद्रों के आसपास धार्मिक आयोजनों, सामाजिक कार्यक्रमों, जुलूसों और निजी आयोजनों में तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाए जाने की शिकायतें मिल रही थीं। इससे न केवल परीक्षार्थियों का ध्यान भटक रहा था, बल्कि शिक्षकों और परीक्षा ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए यह सख्त कदम उठाया गया।

किसे और कहां से लेनी होगी अनुमति

जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी प्रकार के ध्वनि विस्तारक यंत्र के उपयोग से पहले लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा। जिला मुख्यालय बलौदा बाजार में यह अनुमति अनुविभागीय दंडाधिकारी द्वारा दी जाएगी। अन्य अनुविभाग मुख्यालयों की तहसीलों में संबंधित एसडीएम और अनुविभाग मुख्यालय से अलग तहसीलों में तहसीलदार एवं कार्यपालिक दंडाधिकारी अनुमति प्रदान करेंगे। यह प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियमों के अनुरूप होगी।

रात्रिकालीन उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित

आदेश में यह भी साफ कर दिया गया है कि किसी भी परिस्थिति में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर या अन्य ध्वनि उपकरणों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस अवधि में नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन की सख्ती से क्या होगा असर

प्रशासन का मानना है कि इस आदेश से परीक्षा केंद्रों के आसपास शांति का माहौल बनेगा और छात्रों को बेहतर ढंग से परीक्षा देने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही आम नागरिकों को भी अनावश्यक शोर-शराबे से राहत मिलने की उम्मीद है। पुलिस और राजस्व अमले को निर्देश दिए गए हैं कि वे लगातार निगरानी रखें और शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई करें।

किसे होगा फायदा, किसे हो सकती है परेशानी

इस फैसले से सबसे बड़ा लाभ छात्रों, शिक्षकों और परीक्षा ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को मिलेगा। वहीं धार्मिक, सामाजिक या निजी आयोजनों के आयोजकों को अब पहले से अनुमति लेकर ही कार्यक्रम आयोजित करने होंगे, जिससे उन्हें समय पर औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ेंगी। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था अस्थायी नहीं बल्कि कानून के तहत लागू है और भविष्य में भी ऐसे हालात में इसी तरह सख्ती बरती जाएगी।

दूरगामी प्रभाव की उम्मीद

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि इस आदेश से लोगों में ध्वनि प्रदूषण को लेकर जागरूकता बढ़ेगी और आने वाले समय में भी नियमों के पालन की संस्कृति विकसित होगी। इससे न केवल परीक्षाओं के दौरान बल्कि सामान्य दिनों में भी शांति व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी। जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि सभी लोग नियमों का पालन करें और बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए शांत वातावरण बनाए रखने में प्रशासन का साथ दें।

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Author: UnfearNews

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