हाईकोर्ट ने पंचायत विभाग का आदेश किया खारिज: सहायक शिक्षक को मिलेगी क्रमोन्नति वेतनमान की पात्रता

हाईकोर्ट ने पंचायत विभाग का आदेश किया खारिज: सहायक शिक्षक को मिलेगी क्रमोन्नति वेतनमान की पात्रता

लीगल रिपोर्टर। बिलासपुर

सहायक शिक्षक एलबी साजिद खान कुरेशी को उनकी 10 वर्षों की सेवा के आधार पर क्रमोन्नति वेतनमान का लाभ मिलेगा। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस संबंध में जनपद पंचायत बागबाहरा के उस आदेश को खारिज कर दिया है, जिसमें उनकी पात्रता को नकारते हुए सेवा पुस्तिका से क्रमोन्नति प्रविष्टि हटाई गई थी।

हाईकोर्ट ने पंचायत विभाग का आदेश किया खारिज: सहायक शिक्षक को मिलेगी क्रमोन्नति वेतनमान की पात्रता
हाइकोर्ट से हुआ आदेश।

साजिद खान कुरेशी ने हाइकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि वह महासमुंद जिले के शासकीय प्राथमिक शाला घड़ाघाट में शिक्षक पंचायत एलबी के पद पर उनकी नियुक्ति वर्ष 2005 में हुई थी। वर्ष 2018 में उनका संविलियन शिक्षा विभाग में सहायक शिक्षक (एलबी) पद पर हुआ। शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 10 मार्च 2017 को जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सहायक शिक्षकों को प्रथम क्रमोन्नति 10 वर्ष की निरंतर सेवा के बाद और द्वितीय क्रमोन्नति 20 वर्ष के बाद दी जाएगी।

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हालांकि, बागबाहरा जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने 27 जनवरी 2021 को यह कहते हुए कुरेशी के अभ्यावेदन को खारिज कर दिया था कि वे 2018 में एलबी पद पर संविलियन हुए हैं, अतः उन्हें पंचायत पद पर दी जाने वाली क्रमोन्नति नहीं मिल सकती। इस निर्णय से असहमति जताते हुए साजिद कुरेशी सहित कुल 37 शिक्षकों ने अधिवक्ता वकार नायर के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।

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याचिका में तर्क दिया गया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति पंचायत पदों पर वर्ष 2001 से 2005 के बीच हुई थी। संविलियन के बावजूद उन्हें उनकी पूर्व सेवाओं का लाभ मिलना चाहिए। याचिकाकर्ता की ओर से सोना साहू बनाम राज्य सरकार मामले का भी उल्लेख किया गया, जिसमें पूर्व सेवा को मान्य मानते हुए हाईकोर्ट ने क्रमोन्नति वेतनमान देने का आदेश पारित किया था।

न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडे की एकलपीठ ने सुनवाई करते हुए माना कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति तिथि और सेवा की प्रकृति सोना साहू प्रकरण जैसी ही है। इसलिए पूर्व आदेशों के अनुरूप इन्हें भी क्रमोन्नति वेतनमान से वंचित नहीं किया जा सकता।

अदालत ने बागबाहरा जनपद द्वारा क्रमोन्नति निरस्त करने वाले आदेशों (15 और 17 जनवरी 2021) को रद्द कर दिया और याचिकाकर्ताओं को सोना साहू के तर्ज पर वेतन लाभ देने का निर्देश जारी किया। यह फैसला राज्य के उन शिक्षकों के लिए मार्गदर्शक बन सकता है, जिन्हें संविलियन के बाद क्रमोन्नति से वंचित रखा गया है।

Deependra Shukla
Author: Deependra Shukla

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