
हाईकोर्ट ने प्राचार्य का स्थानांतरण आदेश किया निरस्त, जानिए पूरा मामला
लीगल रिपोर्टर|बिलासपुर
छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट बिलासपुर ने हृदय संबंधी बीमारी के आधार पर प्राचार्य विजय कुमार वर्मा के स्थानांतरण आदेश को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने राज्य सरकार के आदेश को खारिज करते हुए प्राचार्य को उनके मूल पद पर पुनः पदस्थ करने का निर्देश दिया है।

सागरदीप कॉलोनी, उसलापुर निवासी विजय कुमार वर्मा वर्तमान में स्वामी आत्मानंद उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पेण्ड्रा में प्राचार्य के पद पर पदस्थ थे। राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश के तहत उन्हें डीईओ कार्यालय में स्थानांतरित किया गया था। वर्मा ने अपने स्थानांतरण को हाईकोर्ट में चुनौती दी और अधिवक्ता अभिषेक पांडेय एवं स्वाति रानी सराफ के माध्यम से याचिका दायर की।
हाइकोर्ट ने स्वास्थ्य कारणों के आधार पर दिया राहत
हाइकोर्ट में दायर याचिका में बताया गया कि विजय कुमार वर्मा की उम्र 61 वर्ष है और वे हृदय संबंधी बीमारी (Mild Apical Hypokinesia & Regional Wall Motion Abnormality) से ग्रस्त हैं। इस स्थिति में उन्हें शारीरिक श्रम करने में कठिनाई होती है, जिससे डीईओ कार्यालय में पदस्थ होना उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता था। हाइकोर्ट ने उनकी चिकित्सा स्थिति को गंभीरता से लेते हुए स्थानांतरण आदेश को अनुचित करार दिया।
हाइकोर्ट ने दूसरे शिक्षक का स्थानांतरण भी रोका
हाइकोर्ट ने विजय कुमार वर्मा के साथ ही राकेश नंद का स्थानांतरण भी किया गया था, जिन्हें स्वामी आत्मानंद उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, गौरेला भेजा गया था। हाईकोर्ट ने इस स्थानांतरण पर भी रोक लगा दी और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि बिना ठोस कारणों के इस तरह के स्थानांतरण न किए जाएं।
हाइकोर्ट का आदेश
27 मार्च 2025 को हाइकोर्ट बिलासपुर ने W.P.(S) No. 1588/2025 पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि विजय कुमार वर्मा को पुनः स्वामी आत्मानंद उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पेण्ड्रा में प्राचार्य के पद पर बहाल किया जाए। अदालत ने स्वास्थ्य संबंधी मामलों में कर्मचारियों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए उनके स्थानांतरण पर विशेष विचार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
हाइकोर्ट से प्राचार्य वर्मा को राहत, प्रशासन को निर्देश
हाईकोर्ट के इस आदेश से विजय कुमार वर्मा को बड़ी राहत मिली है। उन्होंने हाइकोर्ट के फैसले पर संतोष व्यक्त किया। दूसरी ओर, प्रशासन को भी यह संदेश दिया गया है कि बिना ठोस आधार के स्थानांतरण आदेश जारी करना अनुचित होगा, विशेष रूप से जब मामला स्वास्थ्य से जुड़ा हो। यह मामला सरकारी शिक्षकों के स्थानांतरण में पारदर्शिता और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत को रेखांकित करता है।
Author: UnfearNews
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