26 वर्षों की परंपरा: देश के सबसे बड़े स्थाई तोरवा घाट पर खुला छठ पूजा कार्यालय

26 वर्षों की परंपरा: देश के सबसे बड़े स्थाई तोरवा घाट पर खुला छठ पूजा कार्यालय

बिलासपुर। लोक आस्था, सूर्योपासना और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का महापर्व छठ अब बिलासपुर की साझा सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। अरपा नदी के तट पर देश का सबसे बड़ा छठ घाट है, जहां पिछले 26 वर्षों से आयोजित हो रहे इस महापर्व की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसी क्रम में रविवार, 1 नवंबर को सुबह 11 बजे तोरवा स्थित छठ घाट पर छठ पूजा समिति के कार्यालय का विधिवत शुभारंभ किया गया। मंगलाचरण और छठी मैया के जयघोष के बीच समाज के वरिष्ठजनों एवं समिति के पदाधिकारियों ने पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर कार्यालय का उद्घाटन किया। इसके साथ ही छठ महापर्व 2026 के आयोजन की औपचारिक तैयारियों ने गति पकड़ ली है।

26 वर्षों की परंपरा: देश के सबसे बड़े स्थाई तोरवा घाट पर खुला छठ पूजा कार्यालय
छठ पूजा घाट पर उपस्थित समिति के सदस्य।

पाटलिपुत्र संस्कृति विकास मंच, भोजपुरी समाज और सहजानंद समाज के सहयोग से पिछले 26 वर्षों से बिलासपुर में सामूहिक रूप से छठ महापर्व मनाया जा रहा है। शुरुआत में यह आयोजन मुख्य रूप से बिहार और उत्तर भारत के समाज से जुड़ा था, लेकिन समय के साथ इसमें स्थानीय नागरिकों की भागीदारी लगातार बढ़ी है। आज छठ महापर्व पूरे बिलासपुर का सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सव बन चुका है। तोरवा स्थित छठ घाट को एशिया के सबसे बड़े मानव निर्मित स्थायी छठ घाट के रूप में भी पहचान मिली है। पर्व के दौरान यहां हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी आस्था और सामाजिक एकजुटता का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती है। कार्यालय शुभारंभ के अवसर पर एन.पी. शर्मा, संजय सिंह, बबलू कश्यप, बी.बी. तिवारी, सुरेंद्र प्रताप सिंह, नवल किशोर सिंह, धीरज झा, अनिल सिंह, भरत भूषण झा, दिलीप श्रीवास, निर्भय चौधरी, रामजन्म विश्वकर्मा, लव दीक्षित, शशि मिश्रा, सतीश सिंह, विशाल श्रीवास, विनोद पांडे, बृजराज सिंह, रामदेव यादव, कन्हैया चौधरी, चंदन सिंह, नागेंद्र सिंह, लक्ष्मण सिंह, रविंद्र कुशवाहा, हर्ष सिंह, सुरेश सिंह, नरेश मिश्रा और विकास राय सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।

घाट की सफाई से लेकर सजावट तक शुरू होंगी तैयारियां

पूजा कार्यालय के शुभारंभ के साथ ही छठ घाट को व्यवस्थित और आकर्षक स्वरूप देने की तैयारियां शुरू की जा रही हैं। घाट की साफ-सफाई, रंग-रोगन, पुल की पुताई, सजावट और विद्युत साज-सज्जा सहित विभिन्न व्यवस्थाओं को लेकर समिति ने आयोजन का प्रारूप तैयार किया है। पदाधिकारी घाट की व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर रहे हैं, ताकि व्रतियों और श्रद्धालुओं को पूजा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो। दिवाली के बाद तैयारियों में और तेजी आएगी तथा समिति के सदस्य अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालेंगे।

26 वर्षों की परंपरा: देश के सबसे बड़े स्थाई तोरवा घाट पर खुला छठ पूजा कार्यालय
कार्यालय में पूजा करते समिति के लोग।

कार्यालय शुभारंभ के अवसर पर समिति के सदस्यों और पदाधिकारियों के बीच कार्यों का विभाजन भी किया गया। छठ पूजा समिति ने कार्यालय का समय प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक निर्धारित किया है। इस दौरान समिति के पदाधिकारी आयोजन से संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी देने के साथ स्थानीय और बाहर से आने वाले छठव्रतियों को आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराएंगे।

13 नवंबर को नहाय-खाय, 16 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य

इस वर्ष छठ महापर्व के चार दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान 13 नवंबर से शुरू होंगे। पहले दिन नहाय-खाय के साथ पर्व का शुभारंभ होगा। इसी दिन अरपा नदी के तट पर माता अरपा की महाआरती का आयोजन भी किया जाएगा। 14 नवंबर को खरना होगा। 15 नवंबर को व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को संध्या अर्घ्य अर्पित करेंगे, जबकि 16 नवंबर को उदीयमान सूर्य को प्रातः अर्घ्य देने के साथ चार दिवसीय महापर्व का समापन होगा।

26 वर्षों की परंपरा: देश के सबसे बड़े स्थाई तोरवा घाट पर खुला छठ पूजा कार्यालय
फीता काटकर कार्यालय का हुआ उद्घाटन।

छठ पर्व की विशेषता इसकी कठिन साधना, शुद्धता, संयम और प्रकृति के प्रति समर्पण में निहित है। इस पर्व में नदी, जल, सूर्य और प्रकृति को साक्षी मानकर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलकामना के लिए व्रत किया जाता है। अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देकर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है और अगले दिन उगते सूर्य की पहली किरण के साथ जीवन में नई ऊर्जा एवं सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

स्थानीय नागरिकों की भागीदारी ने बनाया पूरे शहर का उत्सव

बिलासपुर में छठ महापर्व की बढ़ती लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब स्थानीय नागरिक भी पूरे उत्साह के साथ इस परंपरा का हिस्सा बनते हैं। संध्या अर्घ्य के अवसर पर अरपा तट पर हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। सुबह के अर्घ्य के दौरान भी घाट पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। अरपा महाआरती और संध्या आरती में स्थानीय नागरिकों की सहभागिता आयोजन को और व्यापक बनाती है।

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बिलासपुर से बाहर रहने वाले अनेक परिवार भी इस अवसर पर अपने घर लौटते हैं। घाट पर सजे सूप, फल, दीपों की रोशनी, छठ के पारंपरिक गीत और नदी के जल में खड़े होकर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करते व्रतियों की कतारें पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देती हैं। चार दिनों तक अरपा का तट लोक संस्कृति, परंपरा और आस्था के विशाल उत्सव में बदल जाता है।

समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों की रहेगी जिम्मेदारी

छठ पूजा समिति के अध्यक्ष प्रवीण झा और सचिव विनोद सिंह के साथ पदाधिकारियों में डॉ. धर्मेंद्र कुमार दास, सुधीर झा, ए.के. कंठ, लव कुमार ओझा, राम प्रताप सिंह, रौशन सिंह, धनंजय झा, प्रशांत सिंह, हरिशंकर कुशवाहा, दिलीप चौधरी, राकेश दीक्षित और डॉ. कुमुद रंजन सिंह शामिल हैं।

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कार्यकारिणी सदस्यों में पी.सी. झा, चंद्र किशोर प्रसाद, अजीत पंडित, प्रमोद सिंह, संजय शर्मा, रामसखा चौधरी, मुकेश झा, चंदन सिंह, राजीव गिरी, निर्भय चौधरी, दिलीप श्रीवास, विकास राय, सतीश सिंह, विनोद सिन्हा, हेमंत झा, जितेंद्र ठाकुर, सी.एम. सिंह, परमेंद्र सिंह, अर्जुन सिंह, रविंद्र सिंह, आशीष मिश्रा, अंबिकेश पांडे, रविंद्र कुशवाहा, शौलेंद्र सिंह, रुपेश कुशवाह, शशि मिश्रा, आदित्य सिंह, राजीव सिंह, मुन्ना सिंह, अमरकांत तिवारी और राम गोस्वामी शामिल हैं। समिति के मार्गदर्शन के लिए गठित संरक्षक मंडल में एच.पी.एस. चौहान, एस.पी. सिंह, व्ही.एन. झा, डॉ. बृजेश सिंह, आर.पी. सिंह, अशोक झा, एस.के. सिंह, विजय ओझा, गणेश गिरी और अभय नारायण राय शामिल हैं।

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Author: UnfearNews

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