निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर: पं. बंशराज तिवारी स्मृति में 6 को चंदा देवी तिवारी हॉस्पिटल में होगी जांच

निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर: पं. बंशराज तिवारी स्मृति में 6 को चंदा देवी तिवारी हॉस्पिटल में होगी जांच

निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर: पं. बंशराज तिवारी स्मृति में 6 को चंदा देवी तिवारी हॉस्पिटल में होगी जांच

निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर पूर्व विधायक, अधिवक्ता और समाजसेवी स्व. पं. बंशराज तिवारी की जयंती पर चंदा देवी तिवारी हॉस्पिटल में 6 मई को आयोजित है। इसमें सुबह 10 बजे से विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा निःशुल्क जांच, ऑपरेशन, दवा वितरण और परामर्श दिया जाएगा।

हेल्थ डेस्क|बलौदा बाजार

निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर चंदा देवी तिवारी हॉस्पिटल में बलौदा बाजार के पूर्व विधायक (1977-80), वरिष्ठ अधिवक्ता, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं समाजसेवी स्वर्गीय पं. बंशराज तिवारी की स्मृति में 6 मई बुधवार को 20वां निःशुल्क रोग निदान शिविर आयोजित किया जाएगा।

विधायक रहते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. कैलाश जोशी के साथ पंडित बंशराज तिवारी।

यह शिविर उनकी जन्मजयंती के अवसर पर उनके पुत्र वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रमोद तिवारी द्वारा पिछले लगातार 20 वर्षों से आयोजित किया जा रहा है, जिससे अब तक हजारों मरीज लाभान्वित हो चुके हैं। इस एक दिवसीय शिविर में सामान्य रोगों के साथ-साथ स्त्रीरोग, नेत्ररोग, दंतरोग, अस्थिरोग, उदर रोग, श्वसन रोग, रक्तचाप, मधुमेह सहित अनेक बीमारियों की जांच निःशुल्क की जाएगी। साथ ही हाइड्रोसिल, हर्निया, बवासीर जैसे रोगों से पीड़ित मरीजों के लिए आवश्यक ऑपरेशन की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। जरूरत के अनुसार मरीजों के खून की जांच, एक्स-रे, सोनोग्राफी, ईसीजी, दवा वितरण तथा गंभीर रोगियों को उचित चिकित्सकीय सलाह और संभावित उपचार भी निःशुल्क प्रदान किया जाएगा।

यह खबर भी पढ़ें 👉 जिला भाजपा कार्यसमिति बैठक में संगठन विस्तार: तीन पदाधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी

शिविर में डॉ. प्रमोद तिवारी के साथ उनके पुत्र डॉ. नितिन तिवारी, पुत्रवधु डॉ. गीतिका शंकर तिवारी, पुत्री डॉ. सुकृति तिवारी सहित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ चिकित्सक अपनी सेवाएं देंगे। आयोजन समिति ने बताया कि शिविर का पंजीयन प्रारंभ हो चुका है और अधिक से अधिक जरूरतमंद मरीजों से इसका लाभ उठाने की अपील की गई है। शिविर सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित होगा।

जनसेवा, न्याय और विकास की त्रिवेणी थे पं. बंशराज तिवारी

6 मई 1925 को जन्मे पं. बंशराज तिवारी छत्तीसगढ़ की राजनीतिक, सामाजिक और न्यायिक चेतना के सशक्त स्तंभ माने जाते हैं। वे एक कुशल अधिवक्ता, सिद्धांतनिष्ठ विधायक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और समर्पित समाजसेवी थे। उन्होंने सत्ता को कभी लक्ष्य नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम माना और जीवनभर अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।

पटेल का पद छोड़कर स्वतंत्रता संग्राम में लिए थे भाग

पटेल सेनिटेशन पंचायत के अध्यक्ष पं. महावीर प्रसाद तिवारी के पुत्र के रूप में जन्मे बंशराज तिवारी बाल्यावस्था में ही पिता के निधन के बाद जिम्मेदारियों से घिर गए थे। कम उम्र में ही पटेल पद पर आसीन हुए, लेकिन 1940 में स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के लिए उन्होंने इस पद से त्यागपत्र दे दिया। 1946 में समाजवादी कांग्रेस पार्टी से जुड़कर उन्होंने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की।

जरूरतमंदों को न्याय दिलाने में निभाई भूमिका

अधिवक्ता के रूप में उन्होंने वकालत को केवल पेशा नहीं, बल्कि गरीब, शोषित और जरूरतमंद लोगों को न्याय दिलाने का माध्यम बनाया। बलौदा बाजार बार एसोसिएशन के सचिव रहते हुए उन्होंने बलौदा बाजार को जिला बनाने और छत्तीसगढ़ को पृथक राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को मजबूती से उठाया।

आपातकाल के विरोध में भेजे गए थे सेंट्रल जेल

आपातकाल के दौरान जब लोकतंत्र पर संकट आया, तब उन्होंने खुलकर विरोध किया और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। राजद्रोह जैसे गंभीर आरोपों का सामना करते हुए वे रायपुर सेंट्रल जेल में मधु लिमये और जॉर्ज फर्नांडिस जैसे राष्ट्रीय नेताओं के साथ कारावास में रहे। इस संघर्ष ने उन्हें एक प्रखर जननेता के रूप में स्थापित किया।

जनता पार्टी की टिकट से 1977 में बने थे बलौदा बाजार के विधायक

सन 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर वे बलौदा बाजार से विधायक निर्वाचित हुए। विधानसभा में मुख्य सचेतक के रूप में उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए उल्लेखनीय कार्य किए। शिवनाथ नदी से बलौदा बाजार तक जल प्रदाय योजना, अतिरिक्त सत्र न्यायालय की स्थापना, निजी महाविद्यालय का शासकीयकरण, टेलीफोन एक्सचेंज, डाकघर, अस्पताल विस्तार, ग्रामीण सड़कों, पुल-पुलियों और पेयजल व्यवस्था जैसे अनेक कार्य उनके छोटे से कार्यकाल की बड़ी उपलब्धियां रहीं। पं. बंशराज तिवारी का संपूर्ण जीवन मानवता, न्याय और विकास को समर्पित रहा। वे आज भी बलौदा बाजार में एक सच्चे जननेता, विकासपुरुष और जनसेवा के प्रेरणास्रोत के रूप में याद किए जाते हैं।

निधन के बाद भी सेवा की परंपरा जारी

9 फरवरी 2006 को उनके निधन के बाद भी परिवार ने उनकी जनसेवा की विरासत को जीवित रखा। पिछले 20 वर्षों से निःशुल्क रोग निदान शिविर के माध्यम से हजारों मरीजों का उपचार किया जा चुका है। परिवार द्वारा मुख्य मार्ग चौड़ीकरण के लिए भूमि दान, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यालय हेतु भूमि दान जैसे कार्य भी उनकी राष्ट्रसेवा और समाज समर्पण की भावना को दर्शाते हैं।

UnfearNews
Author: UnfearNews

हम बनेंगे आपकी समस्या का आवाज बिना डरे, बिना भेदभाव किए...