
चोला मंडलम के कर्मचारियों को कोर्ट से लगा झटका: अग्रिम जमानत अर्जी खारिज, जानिए पूरा मामला
क्राइम रिपोर्टर| बलौदा बाजार
छत्तीसगढ़ राज्य के बलौदा बाजार जिले में चोला मंडलम फाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों को कोर्ट से बड़ा झटका लगा। दरअसल कर्मचारियों के खिलाफ डकैती का मामला पुलिस ने दर्ज किया है। गिरफ्तारी से बचने के लिए चोला मंडलम फाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों ने सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की थी जिसे न्यायालय खारिज कर दी है।

मामले में प्रार्थी आकाश साहू ने कोर्ट द्वारा जारी आदेश की कॉपी के माध्यम से बताया कि उनके परिवाद पर चोला मंडलम फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी आशुतोष मिश्रा, खिलेश्वर जायसवाल, राजेंद्र कुमार तिवारी, सत्यम शुक्ला, अविनाश जयसवाल के खिलाफ सिटी कोतवाली थाना में अपराध क्रमांक 411/2024 दर्ज है। जिसमें सभी के खिलाफ चोरी, लूट और डकैती करने की धाराओं में अपराध पंजीबद्ध किया गया था।

इस मामले में दर्ज हुई डकैती की धारा में गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपियों ने अधिवक्ता अनादि शंकर मिश्रा के माध्यम से अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की। इस मामले की सुनवाई द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश संजया रात्रे की अदालत में हुई। इसमें राज्य सरकार की तरफ से विशेष अपर लोक अभियोजक अमिय अग्रवाल और प्रार्थी आकाश साहू के तरफ से अधिवक्ता योगेश नामदेव ने पक्ष रखने के लिए शामिल हुए।

आरोपियों ने अपनी अर्जी में कहा कि प्रार्थी ने एक परिवाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश की थी, जिसके आदेश पर सिटी कोतवाली पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। आरोपियों के तरफ से कहा गया कि वे निर्दोष हैं और उन्हें प्रकरण में रंजिशवश झूठा फंसाया गया है। आवेदकगण की ओर से प्रस्तुत अग्रिम जमानत आवेदन को पूर्व में द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश, बलौदा बाजार के द्वारा दिनांक 02 जुलाई 2024 को निरस्त किया गया है। आवेदकगण का अग्रिम जमानत आवेदन पत्र क्रमांक 818/2024 को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने 24 जुलाई 2024 को स्वीकार किया गया था, जिसके उपरांत दौरान विवेचना आरक्षी केन्द्र ने फिर से एक नई धारा 392 भा.दं.सं. समायोजित किये जाने पर फिर से अग्रिम जमानत आवेदन पेश किये जाने पर न्यायालय ने पुनः खारिज किया है। आवेदकगण के द्वारा फिर हाइकोर्ट के समक्ष अग्रिम जमानत आवेदन मिसलेनियस क्रिमिनल केस क्रमांक 1096/2025 पेश किए जाने पर 24 जुलाई 2025 को धारा 392 भा.दं.सं. के लिए अग्रिम जमानत आवेदन का लाभ दिया गया है। उसके बाद सिटी कोतवाली ने 29 सितंबर 2025 को अभियोगपत्र पेश करने की सूचना दी। जिसमें इस बात की जानकारी हुई कि आवेदकगण के खिलाफ फिर से धारा 395 भा.दं.सं. जोड़ दी गयी है। भारतीय दंड संहिता की धारा 392 और 395 भा.दं.सं. के घटक एक ही है, मात्र अभियुक्तों की संख्या में अंतर है, ऐसी स्थिति में हाइकोर्ट के द्वारा मिसलेनियस क्रिमिनल केस क्रमांक 1096/2025 आदेश दिनांक 24 जुलाई 2025 में प्रतिपादित सिद्धांतों के परिप्रेक्ष्य में नवनिर्मित धारा 395 भा.दं.सं. में जमानत प्राप्त करने के अधिकारी हैं। आवेदकगण संभ्रांत परिवार के सदस्य हैं, जिनके गिरफ्तार होने से उनकी छवि धूमिल होगी। आवेदकगण दिये गये पते के स्थायी निवासी है, जिनके जमानत दिये जाने पर फरार होने की कोई संभावना नहीं है व न्यायालय के समस्त आदेशों व शर्तों का पालन करने को तैयार हैं।

आवेदकगण का न्यायालय के समक्ष यह तृतीय अग्रिम जमानत आवेदन पत्र है, प्रथम और द्वितीय अग्रिम जमानत आवेदन पत्र को द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश, बलौदा बाजार के द्वारा निरस्त किया जा चुका है। हाइकोर्ट से आवेदकगण का पूर्व में दोनों अग्रिम जमानत आवेदन स्वीकार किया जा चुका है, जिसकी वेबप्रति संलग्न है। प्रस्तुत जमानत आवेदन के अतिरिक्त अन्य कोई जमानत आवेदन पत्र किसी भी सक्षम न्यायालय या हाइकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया है न ही विचाराधीन है और न ही निरस्त किया गया हैं। इसलिए याचिकाकर्ताओं ने अपने जमानत आवेदन पत्र को स्वीकार किये जाने का निवेदन किया। इस अग्रिम जमानत आवेदन के समर्थन में उन्होंने अपना-अपना स्वयं का शपथ पत्र पेश किए। साथ ही जमानत आवेदन पत्र के समर्थन में सूची अनुसार प्रस्तुत दस्तावेजों MCRCA No-818/2024 तथा MCRCA No-1096/2025 के आदेश की प्रति पेश करते हुए उक्त आदेश के आलोक में आवेदकगण को अग्रिम जमानत का लाभ दिये जाने का निवेदन किया।

राज्य की ओर से विशेष अपर लोक अभियोजक ने प्रस्तुत जमानत आवेदन को खारिज किये जाने का निवेदन किया। प्रार्थी की ओर से अग्रिम जमानत पर रिहा किये जाने में आपत्ति पेश की गई। कोर्ट द्वारा केस डायरी का अवलोकन किया गया।
यह है पूरा मामला
केस डायरी के अनुसार अभियोजन का मामला संक्षेप में इस प्रकार है कि – प्रार्थी आकाश साहू के यहां दिनांक 05 जनवरी 2024 को शाम 6 बजे उसके घर गए आशुतोष से बात हुई कि गाड़ी कहां है, वे लोग लोकेशन देखने आए हैं। उसने अपने पिता से बात करवाया उसने अपने पिता को बोलकर गाड़ी का लोकेशन बताया, वहां जाने के बाद बोलने लगा कि 7.50 लाख रुपये जमा करो वरना गाड़ी खीच के ले जा रहा हूं। उसने कहा कि वह उसको 82,000/- रुपये दिनांक 02. जनवरी 2024 को दिया था तब अभियुक्त लोग बोले 56000/- रुपये दो, उसने बोला था 05 दिन के अंदर दे देगा। उसने निवेदन किया मैं अम्बिकापुर में काम देख रहा है और 24 घंटे के अंदर आ जाएगा और 58000/- रुपये तुरंत दे रहा है।

यहां पर आपका सिजर मानक ठाकुर के सामने उसके पिता और गोलू जायसवाल देने को तैयार थे और कहा कि 24 घंटे के अंदर आ जाऊगा और हिसाब करके कुछ और दे देगा, नहीं दिया तो फिर गाड़ी खीच के ले जाना। इतने में आशुतोश मिश्रा के द्वारा फोन में उसके साथ गाली-गलौच किया और उसे बर्बाद करने की धमकी दिया और कहा कि तू राजनीति बहुत करता है, कांग्रेसी हो के भाजपा का साथ दिया मेरे भाइयों के साथ गलत किया, कहकर बोलने लगा और उसके पिता के साथ भी गाली-गलौच और अभद्र व्यवहार किया। उसने भी बोला उसके दोनों गाडी CG22-P-7350 एवं CG22-P-7400 चेक डाउन है, चलने योग्य नहीं है, तो बोला गया कि ” मैं खीचकर ले जाऊंगा।” उसके बाद वह रात को 10.00 बजे के बाद एक गाड़ी को ट्रैक्टर से व दूसरा गाड़ी को टोचन क्रेन से खीचकर ले गया और न तो उसके पिता और न ही अन्य किसी व्यक्ति को गाड़ी में क्या सामान है, उसे देखने दिया और न ही किसी प्रकार का पंचनामा बनाया, जो नियम के विरुद्ध है। अतः प्रार्थी की उक्त रिपोर्ट पर अपराध क्रमांक 411/2024 धारा 379, 34 भा.दं.सं. के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया था पश्चात संपूर्ण विवेचना उपरांत धारा 392, 395 भा.दं.सं. के तहत अभियोगपत्र तैयार किया गया है।

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जमानत पर प्रार्थी और पुलिस ने जताई आपत्ति
आरोपियों की ओर से प्रस्तुत सूची अनुसार दस्तावेज के अनुसार माननीय छ.ग. उच्च न्यायालय, बिलासपुर के द्वारा MCRCA No-818/2024 में धारा 379,34 भा.दं.सं. के अपराध के लिए तथा MCRCA No-1096/2025 में धारा 392,34 भा.दं.सं. के अपराध के लिए अग्रिम जमानत का लाभ प्रदान किया गया है, किन्तु वर्तमान में आरोपियों के विरूद्ध धारा 392, 395 भा.दं.सं. के तहत अभियोगपत्र तैयार किया जाना दर्शित है। उनके पूर्व में प्रस्तुत अग्रिम जमानत आवेदन पत्र को इस न्यायालय के द्वारा गुणदोष के आधार पर निराकृत करते हुए खारिज किया जा चुका है। प्रकरण के प्रार्थी द्वारा पुनः उपस्थित होकर आवेदकगण के अग्रिम जमानत आवेदन पर आपत्ति प्रकट किया गया है और थाना सिटी कोतवाली बलौदा बाजार के द्वारा अग्रिम जमानत प्राप्त अभियुक्तगण के द्वारा विवेचना में सहयोग नहीं करने की आपत्ति ली गयी है। अतः ऐसी स्थिति में प्रकरण की समग्र तथ्य और परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने आरोपियों की ओर से प्रस्तुत अग्रिम जमानत आवेदन को खारिज कर दिया।
Author: UnfearNews
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