सरकारी स्कूल के प्राचार्य का कारनामा: बच्चों के लिए खरीदी गई कुर्सियां निजी स्कूलों को बेची

सरकारी स्कूल के प्राचार्य का कारनामा: बच्चों के लिए खरीदी गई कुर्सियां निजी स्कूलों को बेची

सरकारी स्कूल के प्राचार्य का कारनामा: बच्चों के लिए खरीदी गई कुर्सियां निजी स्कूलों को बेची, ग्रामीणों ने पकड़ा, जांच में मिली गड़बड़ी सही पाई गई। गड़बड़ी उजागर होने और चारों तरफ स्कूल शिक्षा विभाग की थू-थू होने के बाद अब निलंबन के लिए कार्रवाई शुरू हुई, लेकिन इस गड़बड़ी पर एफआईआर तक दर्ज कराने की जहमत नहीं उठाई गई।

एजुकेशन रिपोर्टर|बलौदा बाजार

सरकारी स्कूलों में बच्चों को निजी स्कूलों की तरह सुविधा मिले इसके लिए जनता के टैक्स से सरकार कुर्सी – टेबल जैसी व्यवस्था खरीद रही है। इसके विपरीत सरकारी स्कूलों से ही घर चलाने वाले सरकारी स्कूल के प्राचार्य स्कूल को ही बेच खाने पर पड़े हैं। हालिया मामला छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार से सामने आया है। जहां एक प्राचार्य को स्कूल के बच्चों के लिए खरीदी गई कुर्सी को निजी स्कूल को बेचते हुए पकड़ा गया है। हालांकि इस मामले में सरकार अब तक किसी भी तरह की कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराई है। न ही प्राचार्य को निलंबित और कोई दूसरी कार्रवाई कर पाने की हिम्मत दिखा पाई है।

सरकारी स्कूल के प्राचार्य का कारनामा
वह स्कूल जहां पर हुई गड़बड़ी।

सरकारी स्कूल में चोरी की तमाम घटनाएं सामने आती रहती हैं, लेकिन बलौदा बाजार जिले में सरकारी स्कूल के प्राचार्य का कारनामा सामने आया है। यहां एक अलग तरह का मामला सामने आया है। एक कहावत है न कि चोर के हाथ में चाभी दे दिया जाए तो चोरी रुक जाती है, लेकिन इसके विपरीत बलौदा बाजार जिले में रक्षक ही भक्षक बन गया। यहां बच्चों की पढ़ाई के लिए मिली सुविधाएं भी अब सुरक्षित नहीं रहीं। छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले में टुण्डरा के एक सरकारी स्कूल के प्रभारी प्राचार्य रमेश बंजारे ने स्कूल का फर्नीचर कबाड़ बताकर निजी स्कूलों को बेच दिया। मीडिया में खबर चलने और मीडिया कर्मियों द्वारा प्रशासन को जगाने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने अब जांच शुरू की है। हालांकि सच्चाई सामने आने के बाद भी न तो प्राचार्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया और न ही निलंबन की कार्रवाई हो पाई। विभागीय जांच की बात ही दूर जिला शिक्षा अधिकारी और शिक्षा विभाग सहित जिले के अधिकारियों के ढुलमुल रवैया बता रहा है कि किस तरह से प्राचार्य से प्रशासन खौफ में है। हालात देखकर लगता है कि प्राचार्य ने प्रशासन की ही पतलून गीली कर दिए हैं।

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भविष्य गढ़ने की जिसपर थी जिम्मेदारी वह चोर निकला

स्कूल को मंदिर कहा जाता है। क्योंकि शिक्षा हमें स्कूलों से मिलती है। तभी तो भारत के महान चिंतक और विचारक डॉ. अंबेडकर का कहना था, कि शिक्षा एक ऐसा साधन है जो व्यक्ति को सशक्त बनाता है। शिक्षा से व्यक्ति को जीवन की चुनौतियों का सामना करने और समाज में अपनी बात रखने की ताकत मिलती है। शिक्षा व्यक्ति में आत्मविश्वास पैदा करती है, जिससे वह अपनी आवाज उठा सकता है और अपने अधिकारों के लिए लड़ सकता है, जैसे शेरनी दहाड़ती है। उन्होंने तभी तो कहा था कि शिक्षा शेरनी का दूध है, जो पिएगा वह दहाड़ेगा। लेकिन जब शिक्षा के मंदिरों में जिसके ऊपर भविष्य गढ़ने की जिम्मेदारी हो वह चोर निकल जाए, सरकारी संपत्ति की चोरी करे, गबन करे और भ्रष्टाचार में डूब जाए तब ऐसे शिक्षक को शिक्षक कहना न्यायोचित नहीं होगा। सरकारी स्कूल के प्राचार्य का कारनामा ही कहा जाएगा।

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सरकारी स्कूल के प्राचार्य का कारनामा
ग्रामीणों ने सरकारी संपति बेचते पकड़ा।

यह है पूरा मामला

सरकारी स्कूल के प्राचार्य का कारनामा का उजागर टुण्डरा नगरवासियों की सूचना पर मीडिया ने शासकीय उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय टुण्डरा के प्रभारी प्राचार्य रमेश बंजारे और शाला प्रबंधन एवं विकास समिति की सहमति से स्कूल के फर्नीचर को निजी विद्यालयों को बेच देने के मामले को उजागर किया। इसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने जांच के लिए टीम गठित किया। टीम में तहसीलदार टुण्डरा, विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी कसडोल, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी कसडोल, विकासखंड स्रोत समन्वयक, संकुल समन्वयक ने शनिवार को ही स्थल पर जाकर जांच किया गया। सरकारी स्कूल के प्राचार्य का कारनामा जांच में पाया गया कि 8 सितम्बर 2025 को शासकीय उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय टुण्डरा के प्राचार्य, शाला प्रबंधन और विकास समिति के पदाधिकारियों ने पुराना जर्जर भवन को डिसमेन्टल कराए जाने के लिए वहां रखे कबाड़ और अनुपयोगी सामान को बेचने और प्राप्त राशि को शाला विकास समिति के खाते में जमा करने का निर्णय लिया गया। शाला के प्रभारी प्राचार्य बंजारे ने इस निर्णय के आधार पर टुण्डरा नगर के ज्ञान अमृत विद्यालय को 67 नग टेबल -चेयर और धविका पब्लिक स्कूल शिवरीनारायण को 40 नग टेबल -चेयर को कबाड़ मानकर उपयोगी फर्नीचर को बेच दिया। दोनों विद्यालय को बेचे गये फर्नीचर को शनिवार को लगभग 3 बजे शासकीय उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय टुण्डरा के गेट पर नगरवासियों ने रोक लिया। जिसका भौतिक सत्यापन कराया गया। सत्यापन में शिकायत की सत्यता की पुष्टि हुई। सरकारी स्कूल के प्राचार्य का कारनामा सही पाया गया। जांच दल ने शिकायतकर्ताओं के समक्ष 3 पिकअप में लाए गए फर्नीचर को शासकीय उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय टुण्डरा के एक कक्ष में सुरक्षित सीलबंद किया गया साथ ही पंचनामा तैयार कर ताले की चाबी जांच दल ने कब्जे में ले लिया है। जांच दल ने शाला प्रबंधन समिति और प्रभारी प्राचार्य रमेश बंजारे द्वारा कबाड़ मानकर बेचे गये सभी फर्नीचर को सही स्थिति और उपयोग के योग्य पाया गया। जांच दल ने प्रभारी प्राचार्य को कबाड़ के रूप में बेचे गये फर्नीचर अनुपयोगी सामग्री निस्तारण में किसी भी प्रकार के आपलेखन नियम प्रक्रिया का पालन करना नहीं पाया गया और न ही अपलेखन के पूर्व उच्च कार्यालय से अनुमति प्राप्त किया गया। इस प्रकार प्रभारी प्राचार्य रमेश बंजारे के द्वारा अपने पदीय दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही बरती गई है जो कि सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के विपरीत है।

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कलेक्टर ने लिया संज्ञान, शुरू हुई निलंबन की प्रक्रिया

सरकारी स्कूल के प्राचार्य का कारनामा और स्कूल के फर्नीचर को निजी स्कूलों को बेचने के मामले को कलेक्टर दीपक सोनी ने गंभीरतापूर्वक लेते हुए जांच में तथ्य पाए जाने पर शासकीय उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय टुण्डरा के प्रभारी प्राचार्य रमेश बंजारे के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। निर्देशानुसार जिला शिक्षा अधिकारी ने सरकारी स्कूल के प्राचार्य का कारनामा करने वाले प्रभारी प्राचार्य रमेश बंजारे पर निलंबन की कार्यवाही के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा है।

Deependra Shukla
Author: Deependra Shukla

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