नाबालिग से शराब का कराया धंधा, पुलिस कर दी मैनेजर को जेजे एक्ट में बुक, जानिए मामला

नाबालिग से शराब
नाबालिग से शराब का कराया धंधा, पुलिस कर दी मैनेजर को जेजे एक्ट में बुक, जानिए मामला

बलौदा बाजार में सरकारी शराब दुकान का मैनेजर नाबालिग से शराब बिकवा रहा था। पुलिस ने कार्रवाई कर उसे जेजे एक्ट के तहत गिरफ्तार किया। जानें पूरा मामला…

नाबालिग से शराब
पुलिस गिरफ्त में नाबालिग से शराब बिक्री कराने वाला रोहन टंडन।
शराब की दुकानों में शराब की बिक्री बढ़ाने के लिए अपनाए जाने वाले उपायों में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस एक दुकान के मैनेजर को जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में गिरफ्तार की है। गिरफ्तार मैनेजर पैसे की लालच देकर नाबालिग से शराब का धंधा करवाता था। 

क्राइम रिपोर्टर| बलौदा बाजार

नाबालिग से शराब बिकवाने के आरोप पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आबकारी विभाग द्वारा संचालित सरकारी शराब दुकान रवान के मैनेजर को गिरफ्तार किया है। मैनेजर के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत जिले में पहली कार्रवाई की गई है।

बलौदा बाजार में शराब माफिया और कोचिया सक्रिय हैं। महुआ शराब बनाने की बात हो या बेचने की हर गांव में यह अवैध काम धड़ल्ले से हो रहा है। इतना ही नहीं सरकारी शराब दुकानों से शराब लेकर कोचिया क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में अवैध तरीके से बिक्री कर रहे हैं। वहीं मध्यप्रदेश निर्मित शराब और स्थानीय स्तर पर शराब की होने वाली पैकिंग के कई मामले सामने आ चुके हैं। पुलिस और आबकारी विभाग के नाक के नीचे शराब की अवैध बिक्री बेधड़क चल रही है।

जिला मुख्यालय हो या फिर ग्रामीण इलाका या फिर वनांचल क्षेत्र हो बलौदा बाजार, भाटापारा, कसडोल, पलारी, सिमगा, राजादेवरी, बया जैसे इलाके में हर जगह शराब कोचिया सक्रिय हैं। शराब माफिया के कारण हालत यह बन रहे हैं कि आबकारी विभाग की शहरी शराब दुकानों में भी मानक ब्रांडेड शराब नहीं मिल रही है। जबकि कोचिया उन तमाम ब्रांड के हर तरह के बोतल उपलब्ध करा रहे हैं जिसको शराब प्रेमी पसंद करते हैं।यहां हालत यह है कि शराब प्रेमियों और पीनेवाले अपनी इच्छाओं को मारकर दुकान में जिस भी ब्रांड की शराब मिल रही है उसे लेने को मजबूर हैं।

कोचिया शराब दुकानों के मैनेजर से मिलीभगत करके फल फूल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शराब पीने वाले और कथित तौर पर अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाले शराब प्रेमियों को अच्छी ब्रांड नहीं मिल रही। उन्हें शराब के लिए दर दर भटकना पड़ रहा है और शराब कोचियों के सामने मिन्नते लगानी पड़ रही है। अब एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, इसमें एक दुकान का मैनेजर ही शराब को कोचिया को देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उसके खिलाफ किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 के तहत जिले की पहली प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी की गई है।

पुलिस के मुताबिक आरोपी रोहन टंडन को पहले भी आबकारी एक्ट और अन्य अपराधों में गिरफ्तार किया चुका है। लेकिन सवाल यह है कि कार्रवाई होने के बाद भी ऐसे अपराधिक व्यक्ति को आबकारी विभाग ने क्या देखकर और किस फायदे में नौकरी पर रखा? और किन अधिकारियों के संरक्षण में यह नाबालिग बालकों से शराब की अवैध बिक्री करा रहा था? क्या उसके द्वारा बिकवाए जा रहे शराब का कोई कमीशन आबकारी विभाग के क्षेत्रीय अधिकारियों तक और जिले के अधिकारियों और नेताओं तक भी पहुंच रही थी यह भी अब जांच का विषय है।

पैसे का लालच देकर नाबालिग से शराब बिक्री करवाता था

पुलिस के अनुसार, शराब बिक्री करते पकड़ाए अपचारी बालक को पुलिस ने बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया है, जहां परामर्श के दौरान उसने खुलासा किया कि आरोपी रोहन टंडन ने उसे शराब बिक्री का काम सौंपा था। नाबालिग ने बताया कि 29 मार्च को रोहन टंडन उसके घर शराब छोड़कर गया था और हर पौवा बेचने पर 20 रुपए मेहनताना देने की बात कही थी।

मास्टरमाइंड रवान शराब दुकान का मैनेजर निकला

पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी रोहन टंडन शराब दुकान रवान में मैनेजर के पद पर कार्यरत है। यहां बता दें कि छत्तीसगढ़ की तमाम शराब की दुकानों सरकारी हैं, जिसमें हर कर्मचारी की नियुक्ति सरकारी नियमों के तहत की जाती है।
रवान शराब दुकान भी आबकारी विभाग के अंदर आता है जिसमें शराब सप्लाई से लेकर शराब बिक्री कराने तक की जिम्मेदारी आबकारी विभाग के अधिकारियों की होती है। इसके बाद भी रवान शराब दुकान का मैनेजर रोहन टंडन जानते-बूझते नाबालिग से शराब बिक्री के धंधे में धकेला और उसे आर्थिक लालच देकर शराब बिक्री करवाई।

जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत की गई कार्रवाई

नाबालिग से शराब बिक्री के मामले में थाना सिटी कोतवाली पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 336/2025 के तहत धारा 78 किशोर न्याय अधिनियम में प्रकरण पंजीबद्ध कर उसे हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।

पहले भी अवैध शराब और मारपीट के मामलों में हो चुकी है गिरफ्तारी

गिरफ्तार आरोपी रोहन टंडन 25 वर्ष, पुरानी बस्ती, बलौदा बाजार का रहने वाला है। जिसे पहले भी अवैध शराब बिक्री और अन्य आपराधिक मामलों में गिरफ्तार किया जा चुका है।

नाबालिग से शराब की बिक्री कराने वाला आरोपी पुलिस गिरफ्त में।
ये है रवान शराब दुकान का मैनेजर रोहन टंडन।

 

उसके खिलाफ थाना सिटी कोतवाली में पहले भी अपराध क्रमांक 686/2023 धारा 34(02) आबकारी एक्ट और अपराध क्रमांक 698/2023 धारा 294, 506, 323, 34, 325 भादवि के तहत मामले दर्ज हैं। इसके बाद भी वह रवान शराब दुकान का मैनेजर बना दिया गया। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि उसकी नियुक्ति के वक्त उसके आपराधिक मामलों की जांच आबकारी विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने नहीं की।

पुलिस ने कार्रवाई कर आरोपी को भेजा जेल

नाबालिग से शराब बिक्री कराने के मामले में थाना सिटी कोतवाली पुलिस ने आरोपी को 2 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार कर उसे विधिवत न्यायालय में पेश किया। इधर पुलिस इस मामले में अब आगे की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपी पहले भी किसी अन्य नाबालिग से शराब की बिक्री कराया है या इस अवैध धंधे में शामिल कर चुका है या नहीं।

आबकारी विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

नाबालिग से शराब बिक्री कराने के मामले में गिरफ्तार रवान शराब दुकान के मैनेजर रोहन टंडन के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत की गई कार्रवाई के बाद अब आबकारी विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के कार्यप्रणाली और योग्यता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। रोहन टंडन के बारे में कोतवाली पुलिस ने पहले भी अवैध शराब की बिक्री और मारपीट जैसे गंभीर मामले में प्राथमिकी दर्ज कर चुकी है।

ऐसे में आबकारी विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने कभी ऐसे मैनेजर के खिलाफ हुई कार्रवाई के बारे में पुलिस विभाग से जानकारी चाही? क्या आरोपी रोहन टंडन की भर्ती के समय होने वाला पुलिस वेरिफिकेशन किया गया?

अगर पुलिस वेरिफिकेशन किया गया तो क्या उसके खिलाफ दर्ज अपराध के बारे में आबकारी विभाग को जानकारी थी? अगर जानकारी थी तो फिर भर्ती कैसे किया गया? और अगर जानकारी नहीं थी तो आबकारी विभाग कार्रवाई क्यों नहीं किया? क्या अवैध शराब बिक्री कराने के बाद आबकारी विभाग के अधिकारियों को कमीशन दिया जाता था?

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क्या आबकारी विभाग के अधिकारियों के शह पर ही आरोपी रोहन टंडन सरकारी शराब दुकानों की शराब को अवैध तरीके से खपाने का काम कर रहा था?
आबकारी विभाग के अधिकारी क्या कभी रवान शराब दुकान का फिजिकल वेरिफिकेशन करते थे? रवान शराब दुकान को लेकर कई शिकायतें जिला कार्यालय तक पहुंची हैं उनपर कभी जांच क्यों नहीं किया गया? अंतिम बार किस अधिकारी ने रवान शराब दुकान का वेरिफिकेशन किया? उसमें क्या कमियां मिली? क्या कार्रवाई हुई? उस क्षेत्र के आबकारी अधिकारी की भूमिका की कब जांच होगी।

शराब की बिक्री पर कार्रवाई से आबकारी विभाग क्यों बच रहा है? अब जब इस बात का खुलासा हो गया है कि नाबालिग से शराब बिक्री कराया जा रहा था तो क्या रवान शराब दुकान के तमाम कर्मचारियों को आबकारी विभाग हटाएगा? ऐसे तमाम सवाल के जवाब आने बाकी है, माना जा रहा है कि पुलिस जांच में इन सवालों के जवाब भविष्य में मिलेंगे।

उम्मीद की जा रही है कि आबकारी विभाग के वे अधिकारी जिन्हें इस अवैध शराब बिक्री का कमीशन नहीं मिलता होगा वे इन सवालों के जवाब अधीनस्थ अधिकारियों से मांगेंगे।

इस मामले पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट में बताएं और खबर शेयर करें। 

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Author: UnfearNews

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