छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञों की कमी पर जताई नाराजगी, मुख्य सचिव से मांगा जवाब

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“छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञों और प्रयोगशाला की कमी को लेकर राज्य सरकार की निष्क्रियता पर सख्त रुख अपनाया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है।”

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञों की कमी पर जताई नाराजगी, मुख्य सचिव से मांगा जवाब

लीगल रिपोर्टर| बिलासपुर

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश में डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञों और प्रयोगशाला की कमी को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य सरकार की निष्क्रियता पर सख्त रुख अपनाया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए मुख्य सचिव से स्पष्टीकरण मांगा कि केंद्र सरकार के पत्र का अब तक जवाब क्यों नहीं दिया गया। कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को 9 अप्रैल तक व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।

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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में सुनवाई।

 

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में डिजिटल फोरेंसिक लैब और विशेषज्ञों की नियुक्ति को लेकर सुनवाई

छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ में याचिकाकर्ता शिरीन मालेवर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में कहा गया कि देशभर में 16 स्थानों पर डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञ नियुक्त किए गए हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे साइबर अपराधों और डिजिटल धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की जांच प्रभावित हो रही है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम और आईटी एक्ट का दिया हवाला

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञों की जरूरत को रेखांकित करते हुए मामले की गंभीरता को पर चिंता जताई। कोर्ट ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में अपराधों की प्रकृति बदल गई है, साइबर अपराध ऑनलाइन धोखाधड़ी हैकिंग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक अपराधों की जांच के लिए डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञों की नियुक्ति तथा आधुनिक प्रयोगशालाओं की स्थापना बेहद जरूरी है। बिना फोरेंसिक विशेषज्ञों के डिजिटल साक्ष्यों की प्रमाणिकता की जांच संभव नहीं हो सकती।

केंद्र सरकार के पत्र पर कोई जवाब नहीं, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि केंद्र सरकार ने डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञों की नियुक्ति और प्रयोगशाला स्थापित करने के संबंध में छत्तीसगढ़ राज्य सरकार को पत्र भेजा था, लेकिन अब तक राज्य सरकार ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस लापरवाही पर नाराजगी जाहिर करते हुए मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे 9 अप्रैल तक शपथपत्र दाखिल कर इसका कारण स्पष्ट करें।

छत्तीसगढ़ में साइबर अपराध बढ़े, लेकिन जांच के संसाधन सीमित

छत्तीसगढ़ में हाल के वर्षों में साइबर अपराधों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। ऑनलाइन ठगी, बैंकिंग फ्रॉड, डेटा चोरी, सोशल मीडिया अपराध, डिजिटल ट्रांजेक्शन फ्रॉड, फर्जी वीडियो, डिजिटल दस्तावेजों की जालसाजी और हैकिंग जैसी घटनाएं आम हो गई हैं। बावजूद इसके प्रदेश में अब तक कोई समर्पित डिजिटल फॉरेंसिक लैब स्थापित नहीं की गई है। छत्तीसगढ़ पुलिस को डिजिटल सच की जांच के लिए अन्य राज्यों की प्रयोगशालाओं पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे जांच प्रक्रिया में देरी होती है।

छत्तीसगढ़ में जांच प्रक्रिया में देरी से आरोपी मिटा देते हैं सबूत

छत्तीसगढ़ प्रदेश में वर्तमान में कोई समर्पित डिजिटल फॉरेंसिक लैब नहीं है। पुलिस को डिजिटल साक्ष्य को जांच के लिए हैदराबाद, दिल्ली और अन्य राज्यों की फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे न केवल जांच प्रक्रिया में देरी होती है, बल्कि अपराधियों को समय मिल जाता है जिससे वह सबूत मिटाने में सफल हो जाते हैं।

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कैसे होती है डिजिटल फोरेंसिक जांच?

डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञ अपराधों के डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर यह पता लगाते हैं कि अपराध कब, कैसे और किसने किया। इसके लिए निम्नलिखित तकनीकों का उपयोग किया जाता है:

✔ डिवाइस एनालिसिस: मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर से डेटा रिकवरी और उसकी जांच।
✔ नेटवर्क फोरेंसिक: साइबर हमलों और हैकिंग गतिविधियों की निगरानी।
✔ डिजिटल सिग्नेचर और एनक्रिप्शन विश्लेषण: डिजिटल दस्तावेजों और ईमेल जालसाजी की जांच।
✔ डीएनए ऑफ डेटा: फाइलों, तस्वीरें, वीडियो और ऑडियो के स्रोत की पहचान।
✔ डेटा ट्रेसिंग: डिलीट किए गए डेटा और मैसेज को रिकवर कर अपराधी तक पहुंचना।

छत्तीसगढ़ में डिजिटल फोरेंसिक की स्थिति

📌 प्रदेश में कोई डिजिटल फोरेंसिक लैब नहीं है।
📌 पुलिस को दिल्ली, हैदराबाद और अन्य राज्यों की लैब पर निर्भर रहना पड़ता है।
📌 जांच में देरी होने के कारण अपराधियों को सबूत मिटाने का मौका मिल जाता है।
📌 अन्य राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में डिजिटल फोरेंसिक लैब स्थापित की जा चुकी हैं।

अन्य राज्यों की स्थिति

✔ दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु: अत्याधुनिक डिजिटल फोरेंसिक लैब मौजूद, जहां साइबर अपराधों की तेजी से जांच होती है।
✔ मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र: साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन यूनिट और डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञ नियुक्त किए गए हैं।
✔ छत्तीसगढ़: अब तक कोई स्थायी डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञ नहीं, जिससे मामलों की जांच में देरी होती है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की चिंता और अगला कदम

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत डिजिटल फोरेंसिक लैब और विशेषज्ञों की नियुक्ति अनिवार्य है। डिजिटल फोरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद अब 9 अप्रैल को देखना होगा कि राज्य सरकार इस दिशा में क्या कदम उठाती है और हाईकोर्ट के अगले आदेश क्या होंगे। राज्य सरकार पर हैं कि वह डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञों की नियुक्ति और आधुनिक लैब स्थापित करने के लिए क्या पहल करती है।

✅ मामला: प्रदेश में डिजिटल फोरेंसिक लैब और विशेषज्ञों की कमी
✅ याचिकाकर्ता: शिरीन मालेवर
✅ कोर्ट का आदेश: मुख्य सचिव 9 अप्रैल तक शपथपत्र दाखिल करें
✅ कानूनी संदर्भ: भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 और आईटी एक्ट, 2000
✅ प्रदेश में स्थिति: कोई डिजिटल फोरेंसिक लैब और विशेषज्ञ नियुक्त नहीं
✅ केंद्र सरकार का पत्र: राज्य सरकार ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया
✅ अगली सुनवाई: 9 अप्रैल 2025

Deependra Shukla
Author: Deependra Shukla

मैं पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूँ और वर्तमान में Unfearnews में संपादक (Editor) के रूप में कार्यरत हूँ। पत्रकारिता की बारीकियों को समझने और उसे निष्पक्ष व प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करने का मेरा विशेष अनुभव है। मैंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर से 2012-14 में गोल्ड मेडल के साथ पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। इसके बाद ETV, News18, Dainik Bhaskar, NDTV, AajTak जैसी देश की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थाओं के साथ काम किया है। हमारा विजन: स्वतंत्र, निष्पक्ष और शोध-आधारित पत्रकारिता के माध्यम से समाज को सशक्त बनाना और जनता तक सत्य, निष्पक्ष एवं गहन विश्लेषण के साथ समाचार पहुंचाना। 📩 संपर्क करें: ✉️[deependrashukla501@gmail.com] 🌐 [unfearnews.com] [LinkedIn https://www.linkedin.com/in/deependra-kumar-shukla-12532689?utm_source=share&utm_campaign=share_via&utm_content=profile&utm_medium=android_app] 📞 [9109341789]

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