राजस्व मंत्री के गृह जिले में 15 वर्षों से न्याय की तलाश: हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी जमीन पर नहीं मिला कब्जा, बुजुर्ग पीड़ित ने दी आत्मदाह की चेतावनी

राजस्व मंत्री के गृह जिले में 15 वर्षों से न्याय की तलाश: हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी जमीन पर नहीं मिला कब्जा, बुजुर्ग पीड़ित ने दी आत्मदाह की चेतावनी

प्रशासनिक रिपोर्टर|बलौदा बाजार

एक तरफ प्रदेशभर में सुशासन तिहार के माध्यम से सरकार आम जनता को त्वरित न्याय, पारदर्शिता और समस्याओं के समाधान का भरोसा दिला रही है। गांव-गांव में शिविर लगाए जा रहे हैं ताकि कोई भी समस्या बनी ना रहे। वहीं दूसरी तरफ राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा के गृह जिले बलौदा बाजार से तस्वीर सामने आई है जहां इन दावों पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है। यहां ग्राम अर्जुनी में स्थित जमीन पर कब्जा से परेशान बुजुर्ग मोहितराम वर्मा पिछले लगभग 15 वर्षों से अपनी पुश्तैनी जमीन पर अधिकार पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। हाईकोर्ट तक से उनके पक्ष में आदेश आने के बावजूद आज तक उन्हें जमीन पर कब्जा नहीं मिल पाया है।स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि पीड़ित ने जिला प्रशासन को आवेदन देकर स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वह 25 मई को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठेंगे और आत्मदाह जैसा कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे।

राजस्व मंत्री के गृह जिले में 15 वर्षों से न्याय की तलाश
पीड़ित मोहित राम वर्मा।

बलौदा बाजार जिले के ग्राम अर्जुनी में स्थित खसरा नंबर 183, 825/1 एवं 825/4, कुल रकबा 1.203 हेक्टेयर भूमि को लेकर वर्षों से विवाद चल रहा है। मोहितराम वर्मा का कहना है कि यह उनकी पुश्तैनी जमीन है, जिस पर प्रतिवादियों द्वारा अतिक्रमण कर कब्जा कर लिया गया।
मामला तहसीलदार न्यायालय से शुरू होकर सिविल न्यायालय, जिला न्यायालय और अंततः छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बिलासपुर तक पहुंचा। रिकॉर्ड, गवाहों और सीमांकन रिपोर्ट के आधार पर न्यायालयों ने मोहितराम वर्मा के पक्ष में निर्णय दिया। हाईकोर्ट ने भी निचली अदालतों के फैसले को सही ठहराते हुए स्पष्ट किया कि भूमि पर वास्तविक अधिकार मोहित राम वर्मा का है तथा अतिक्रमण हटाकर वैधानिक कब्जा दिलाया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट के आदेश में सीमांकन के दौरान यह भी पाया गया कि प्रतिवादियों ने बुर्जुग मोहित राम वर्मा की भूमि पर अतिक्रमण किया है। इसके बावजूद आज तक आदेश का पालन नहीं हुआ।

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पीड़ित का आरोप है कि हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी के साथ वह लगातार राजस्व विभाग के अधिकारियों को आवेदन दिए हैं। बावजूद इसके प्रशासनिक उदासीनता और प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण उसे न्याय नहीं मिल रहा। पिछले 15 वर्षों से वह तहसील, अनुविभागीय अधिकारी, कलेक्टर कार्यालय, न्यायालय और राजस्व विभाग के चक्कर काट रहा है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला।

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मोहितराम वर्मा का कहना है, “न्यायालय से फैसला मिलने के बाद भी अगर जमीन नहीं मिले, तो आम आदमी आखिर जाए तो जाए कहां? मैंने अपनी पूरी जिंदगी इस लड़ाई में लगा दी, लेकिन आज भी न्याय अधूरा है।”
7 मई 2025 को जिला कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में उन्होंने पूरे मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्षों से न्याय की उम्मीद में सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते-लगाते वह थक चुके हैं। लगातार मानसिक, आर्थिक और सामाजिक प्रताड़ना झेलते-झेलते अब वह टूट चुके हैं और यदि अब भी कार्रवाई नहीं हुई तो भूख हड़ताल और आत्मदाह के अलावा उनके पास कोई रास्ता नहीं बचेगा।

अब सवाल उठता है कि जब राजस्व मंत्री के गृह जिले में ही एक बुजुर्ग को अपनी जमीन के लिए 15 वर्षों तक संघर्ष करना पड़े और हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी न्याय न मिले, तो आम जनता का प्रशासन और कानून व्यवस्था पर विश्वास कमजोर होना स्वाभाविक है।

सुशासन तिहार के बीच यह मामला प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर उजागर कर रहा है। अब यह मामला केवल एक व्यक्ति की जमीन का नहीं, बल्कि न्यायिक आदेशों के सम्मान, प्रशासनिक जवाबदेही और आम नागरिक के अधिकारों की रक्षा का बड़ा प्रश्न बन चुका है। पूरे जिले की नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। अब देखने की बात होगी कि जिला प्रशासन कि पूरे मामले में किस तरीके से कार्रवाई करता है और कितने दिनों में बुजुर्गों को उसकी जमीन मिला पता है।

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Author: UnfearNews

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