गौर का शिकार: गर्भवती बायसन के सिर-पैर काटे, चेतावनी के बावजूद वन विभाग सोता रहा

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गौर का शिकार: गर्भवती बायसन के सिर-पैर काटे, चेतावनी के बावजूद वन विभाग सोता रहा

प्रशासनिक रिपोर्टर|बलौदा बाजार

वन्यजीव संरक्षण पर वन विभाग की लापरवाही भारी पड़ी! अर्जुनी परिक्षेत्र में गौर (बायसन) के करेंट से शिकार की घटना हो गई, इससे जंगल की सुरक्षा व्यवस्था किस तरह से हो रही है इसका खुलासा हो गया है। इस घटना से वन विभाग की व्यवस्था की पोल खुल गई है। घटना के बाद हड़कंप मचते ही विभाग हरकत में आया और जवाबदेही तय करते हुए विभाग के सबसे अदना कर्मचारी वनरक्षक को निलंबित कर दिया गया। जबकि जवाबदेही रेंजर, एसडीओ और डीएफओ स्तर के अधिकारियों की होती है। यह घटना तब हुई है जब विभाग को पहले ही घटना होने शिकार किए जाने की चेतावनी दी गई थी।

गौर का शिकार
करंट से मारी गई मादा गौर।

छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार वन मण्डल के अर्जुनी परिक्षेत्र अंतर्गत बिलाड़ी परिसर के संरक्षित वन कक्ष क्रमांक 324 में दिवाली के दो दिन बाद एक गर्भवती बाइसन (गौर) को बेरहमी से शिकारियों ने मार दिया। शिकारियों को वन विभाग की कम निगरानी के बारे में पता था, इसलिए उनके पास इस जुर्म को अंजाम देने के लिए काफी समय था। उन्होंने न सिर्फ बाइसन को करंट लगाकर मारा, बल्कि उसका सिर और पैर भी काट दिए। मादा बायसन गर्भवती थी और उसके पेट मे विकसित शावक का भ्रूण था। इस दुखद घटना के बाद अवैध गतिविधि को रोकने के लिए अपेक्षित सतर्कता और निगरानी में लापरवाही बरतने के कारण वनरक्षक प्रेमचंद्र घृतलहरे को निलंबित किया गया है। लेकिन उच्च अधिकारियों पर किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं हुई, न ही इस घटना को अंजाम देने वाले आरोपी पकड़े गए हैं।

बता दें कि इस घटना पर रायपुर के नितिन सिंघवी ने वन एवं पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। उन्होंने त्योहारी सीजन में ज्यादा शिकार होने की चेतावनी दी थी और बताया इसके बावजूद यह घटना हुई है।

सिंघवी ने पत्र में लिखा गया है कि यह घटना तब हुई जब कि उन्होंने दिवाली के कई दिनों पूर्व चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन सह प्रधान मुखय वन संरक्षक (वन्यप्राणी) को पत्र लिख कर चेतावनी दी थी कि दिवाली और होली जैसे त्योहारों के मौसम में, लंबी छुट्टियों की वजह से जब फील्ड स्टाफ अक्सर कम असरदार हो जाता है, शिकार की घटनाएं हमेशा बढ़ जाती हैं। शिकार की एक्टिविटी खास तौर पर दिवाली से पहले शरद पूर्णिमा के बाद तेज हो जाती है। इसके अलावा, कुछ समुदाय इस समय के दौरान, खासकर दिवाली से पहले और दो दिन बाद तक जंगली जानवरों को मारते हैं। इसलिए जरूरी निर्देश जारी करने की मांग कि गई थी। साथ मे जहां भी स्निफर डॉग तैनात हों, वहां पेट्रोलिंग के लिए उन्हें असरदार तरीके से तैनात किए जाने का सुझाव दिया गया था। पत्र मे लिखा गया था कि जंगल सफारी में अभी जो स्निफर डॉग है, उसे भी इस काम के लिए दिवाली के समय कुछ समय के लिए बारनवापारा अभ्यारण मे भेजा जाए। गौर तलब है कि, बारनवापारा अभ्यारण्य, बलौदा बाजार वन मण्डल के अंतर्गत आता है। सिंघवी ने बताया कि उनके पत्र को गंभीरता से नहीं लिया गया और बिना किसी ठोस फॉलो-अप के, पोस्ट ऑफिस की तरह, बस मशीनी तरीके से डिवीजनों को फॉरवर्ड कर दिया गया। अगर स्निफर डॉग को बताए गए तरीके से भेजा गया होता, तो बलौदा बाजार वन मण्डल के बारनवापारा अभ्यारण्य में उसकी मौजूदगी का डर भी शिकार रोकथाम का काम कर सकता था। जिससे शायद मासूम बाइसन और उसके अजन्मे बच्चे की जान बच सकती थी।

जंगली सूअर के लिए लगे जाल में फंसकर मरा हाथी

सिंघवी ने बताया कि वन विभाग की लापरवाही के कारण इसी साल दिवाली के एक दिन बाद रायगढ़ वन मण्डल में जंगली सूअर के शिकार के लिए बिछाए गए बिजली का करंट प्रवाहित तार के चपेट में आने से एक हाथी मारा गया है। वन कर्मचारियों के वन और वन्य जीवों पर ध्यान केंद्रित नहीं होने के कारण यह घटना हुई।

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वन विभाग पर संवेदनशील क्षेत्र में टूरिज्म लाने का है गंभीर आरोप

सिंघवी ने पत्र में आरोप लगाया कि आज वन विभाग का वाइल्डलाइफ विंग वन्य प्राणियों की सुरक्षा करने का प्राथमिक काम करने की बजाए जैवविविधता के संवेदनशील इलाकों में भी इको-टूरिज्म प्रोजेक्ट्स लाने में ज्यादा व्यस्त है। सिंघवी ने अतिरिक्त मुख्य सचिव से मांग की कि वन विभाग की वाइल्डलाइफ विंग को तुरंत निर्देश दिए जाएं कि वे टूरिज्म को बढ़ावा देने के बजाय सिर्फ वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन और एंटी-पोचिंग उपायों पर ध्यान दें। हर फॉरेस्ट डिवीजन में, खासकर सभी वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व में ट्रेंड स्निफर डॉग स्क्वॉड तैनात किए जाने चाहिए।

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वन विभाग कर रहा गहन जांच

वन विभाग द्वारा इस प्रकरण की गहन जांच की जा रही है। शिकार में संलिप्त अन्य व्यक्तियों की पहचान कर वैधानिक कार्यवाही की जाएगी। आसपास के सभी परिसरों में गश्त और निगरानी बढ़ा दी गई है। साथ ही स्थानीय ग्रामवासियों से भी वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सतर्क रहने और विभाग को तत्काल सूचना देने की अपील की गई है। गणवीर धम्मशील, वनमण्डलाधिकारी 

Deependra Shukla
Author: Deependra Shukla

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