स्पोर्ट्स रिपोर्टर। भारत
भारतीय क्रिकेट टीम जब भी मैदान पर उतरती है, तो करोड़ों प्रशंसकों की नजरें खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर टिकी रहती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन सितारों की चमक बनाए रखने के लिए पर्दे के पीछे कितने लोग काम करते हैं? भारतीय क्रिकेट टीम का हर खिलाड़ी मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ दे सके, इसके लिए एक बेहद पेशेवर सपोर्टिंग स्टाफ पूरी मेहनत से काम करता है। इस स्टाफ का काम सिर्फ फिटनेस और तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने से लेकर उनके खान-पान तक का ख्याल रखा जाता है।
भारतीय क्रिकेट टीम के प्रदर्शन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी मुख्य कोच पर होती है। यह सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि पूरी टीम का मार्गदर्शन करने वाली ताकत है। मुख्य कोच ही तय करता है कि कौन-सा खिलाड़ी किस नंबर पर खेलेगा, मैच की रणनीति कैसी होगी, और कैसे टीम को हर परिस्थिति के लिए तैयार किया जाएगा। वर्तमान में (मार्च 2025 तक) राहुल द्रविड़ भारतीय टीम के मुख्य कोच हैं। उनके कोच रहते भारत ने कई ऐतिहासिक जीत दर्ज की हैं। द्रविड़ जैसे अनुभवी कोच युवा खिलाड़ियों की तकनीकी खामियों को सुधारने में भी अहम भूमिका निभाते हैं और खिलाड़ियों की मानसिक मजबूती पर विशेष ध्यान देते हैं।
तकनीकी गुरुओं की फौज: बैटिंग, बॉलिंग और फील्डिंग कोच
भारतीय क्रिकेट टीम के हर पहलू को निखारने के लिए विशेषज्ञों की एक पूरी टीम काम करती है। खासकर बल्लेबाजी कोच: रन मशीन तैयार करने वाले रणनीतिकार होते हैं। बल्लेबाजी कोच का काम सिर्फ शॉट्स सुधारना ही नहीं, बल्कि बल्लेबाजों को कठिन परिस्थितियों में टिके रहने की मानसिकता देना भी होता है। भारतीय टीम के बल्लेबाजी कोच संजय बांगर और विक्रम राठौर जैसे अनुभवी खिलाड़ी रह चुके हैं। वे खिलाड़ियों की कमजोरी दूर करने, उनकी फुटवर्क तकनीक सुधारने और उन्हें मानसिक रूप से तैयार करने का काम करते हैं। जबकि गेंदबाजी कोच: तेज और स्पिन गेंदबाजों के असली गुरु होते हैं। ये गेंदबाजी कोच खिलाड़ियों को नई तकनीकों और रणनीतियों से लैस करते हैं। वे सिखाते हैं कि किस पिच पर कैसी गेंदबाजी करनी चाहिए और विरोधी बल्लेबाजों को कैसे फंसाना है। भारतीय गेंदबाजी कोच रह चुके भरत अरुण ने टीम के तेज गेंदबाजों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया था। वही फील्डिंग कोच: बिजली जैसी फुर्ती लाने वाले मास्टरमाइंड होते हैं, यही वजह है कि क्रिकेट में फील्डिंग का महत्व लगातार बढ़ रहा है। टीम इंडिया की चुस्ती और फुर्ती को बढ़ाने के लिए आर श्रीधर जैसे कोच ने खिलाड़ियों की थ्रोइंग, कैचिंग और डाइविंग को बेहतरीन बनाया। आज भारतीय टीम दुनिया की सबसे बेहतरीन फील्डिंग यूनिट्स में गिनी जाती है।
खिलाड़ियों को फिट और इंजरी-प्रूफ बनाने वाली टीम
क्रिकेट अब सिर्फ एक खेल नहीं रहा, बल्कि यह फिटनेस और ताकत का खेल बन चुका है। आधुनिक क्रिकेट में खिलाड़ी की फिटनेस ही उसकी सफलता तय करती है। भारतीय टीम को मजबूत और चोटों से बचाने के लिए कई विशेषज्ञ काम करते हैं। इनमें फिजियोथेरेपिस्ट जो खिलाड़ियों की ‘गुप्त ताकत’ होते हैं। जब भी कोई खिलाड़ी चोटिल होता है, तो उसकी जल्दी रिकवरी में फिजियोथेरेपिस्ट की अहम भूमिका होती है। वे मांसपेशियों की चोट, जोड़ों की तकलीफ और शरीर की अन्य समस्याओं का इलाज करते हैं। वहीं स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग कोच: खिलाड़ियों को फौलाद बनाने वाले विशेषज्ञ होते हैं। यह कोच खिलाड़ियों की ताकत, सहनशक्ति और लचीलापन बढ़ाने का काम करते हैं। जिम ट्रेनिंग, कार्डियो, और वेट ट्रेनिंग इनके कार्यक्रम का हिस्सा होते हैं। फिटनेस कोच सुनिश्चित करते हैं कि खिलाड़ी पूरे मैच के दौरान अपनी ऊर्जा बनाए रख सके। यहां मेडिकल टीम जो खिलाड़ियों की सेहत पर पैनी नजर रखते हैं को भूलना बड़ी गलती होगी। यह टीम इंडिया के पास एक मजबूत मेडिकल टीम होती है, जिसमें डॉक्टर, फिजियोथेरेपिस्ट और अन्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ शामिल होते हैं। वे चोटों की निगरानी करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि खिलाड़ी मैदान पर वापसी के लिए शारीरिक रूप से तैयार रहें।
मानसिक मजबूती देने वाले साइकोलॉजिस्ट और डेटा एनालिस्ट
मनोवैज्ञानिक: दबाव में भी आत्मविश्वास बनाए रखने वाले विशेषज्ञ जो अब क्रिकेट को एक मानसिक खेल बना दिए हैं। बड़े टूर्नामेंटों में जब दबाव बढ़ता है, तो कई खिलाड़ी बिखर जाते हैं। इसीलिए टीम इंडिया के पास एक स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट होता है, जो खिलाड़ियों को दबाव में शांत रहने और आत्मविश्वास बनाए रखने में मदद करता है। साथ ही डेटा एनालिस्ट जो विरोधी टीमों की रणनीति भांपने वाले जासूस होते हैं। आधुनिक क्रिकेट में आंकड़ों का बहुत बड़ा महत्व है। एनालिस्ट विरोधी टीमों के आंकड़ों का विश्लेषण करते हैं, उनकी कमजोरी और ताकत को परखते हैं और उसी के हिसाब से रणनीतियां बनाते हैं। आज की क्रिकेट में डेटा विश्लेषण के बिना कोई भी टीम सफलता की गारंटी नहीं दे सकती।
टीम मैनेजर और अन्य सपोर्ट स्टाफ: मैदान के बाहर की ताकत
टीम इंडिया के खिलाड़ी मैदान पर अपना 100% दे सकें, इसके लिए टीम मैनेजर यात्रा, होटल, अभ्यास शेड्यूल और अन्य प्रशासनिक कार्य संभालते हैं। इसके अलावा, कुक और न्यूट्रिशनिस्ट भी खिलाड़ियों के लिए संतुलित आहार तैयार करते हैं, ताकि वे ऊर्जावान और फिट बने रहें।
आने वाले समय में होने वाले बदलाव
BCCI लगातार अपने सपोर्ट स्टाफ को मजबूत करने के लिए कदम उठा रहा है। आने वाले दिनों में और भी विशेषज्ञों को जोड़ा जा सकता है, जो खिलाड़ियों की मानसिक और शारीरिक मजबूती को और ज्यादा बढ़ाने का काम करेंगे। तो अगली बार जब आप भारतीय टीम को जीतते देखें, तो सिर्फ खिलाड़ियों को नहीं, बल्कि इस सपोर्टिंग स्टाफ को भी सलाम करना मत भूलिए।
Author: Deependra Shukla
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